भाजपा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते सपा कार्यकर्ता
नरेश उत्तम ने उभ्भा नरसंहार के पीड़ितों के परिजनों को आश्वासन दिया कि समाजवादी पार्टी की पूरी सहानुभूति उनके साथ है। मृतक आदिवासियों के परिजनों को न्याय दिलाने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सपा सड़क से संसद तक उनकी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।
पीड़ितों से मिलने के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का भी जायजा लिया और पुलिस से घटना के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर घोरावल के पूर्व विधायक रमेशचंद्र दूबे, चुनार के पूर्व विधायक जगदंबा सिंह पटेल, पूर्व मंत्री कैलाश चौरसिया, पूर्व मंत्री मुन्नी यादव, मिर्जापुर जिलाध्यक्ष आशीष यादव, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष एबाद अहमद, चंदौली जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर, श्यामबिहारी यादव, संजय यादव, बाबूलाल यादव, कृष्णा शर्मा मौजूद रहे।
सिर्फ पांच गाड़ियों से जाने दिया :
सपा प्रतिनिधिमंडल कलवारी के रास्ते मिर्जापुर जनपद से घोरावल तहसील क्षेत्र में प्रवेश किया। घोरावल नगर के मुक्खा मोड़ के रास्ते सपा नेताओं ने उभ्भा जाने लगे। उभ्भा से करीब चार किमी पहले कन्हारी मोड़ पर गाड़ियों के काफिले को पुलिस ने रोक दिया और सिर्फ पांच गाड़ियों से जाने की इजाजत दी। नोंक-झोंक के बाद सपा नेताओं ने पांच गाड़ियों से उभ्भा गांव में प्रवेश किया।
प्रदेश अध्यक्ष को दुख सुनाकर फफक पड़ीं सीता, लालदेई :
सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के नेतृत्व में उभ्भा गए प्रतिनिधिमंडल को अपना दु:ख दर्द बताते हुए रामसुंदर की विधवा सीता व अशोक की विधवा लालदेई फफक कर रो पड़ी। उसने कहा कि दस लाशें गिरने के बाद घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन के लोगों के पहुंचने का क्या काम था। अगर घटना के पहले मामले को सुलझाया गया होता तो शायद इतनी जानें ना जाती।
इस जमीन को तीन पीढ़ियों से उनके दादा परदादा जोत कोड़ रहे हैं। इस जमीन को लेकर उनके पतिए परिजनों व गोंड़ लोगों पर फर्जी मुकदमे लादे गए। उन पर गुंडा एक्ट लगाया गया, जिला बदर किया गया। पुलिस प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट तक गरीब आदिवासियों की कोई सुनवाई नही हुई। घर के बच्चे हाईस्कूल इंटरमीडिएट करने के बाद बेरोजगार बनकर घूमते रहते हैं। उन लोगों के पास खेती व मजदूरी ही एकमात्र सहारा है। उन्हें रोजी रोटी के लिए जमीन चाहिए।