फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आरएस यादव की कोठी पर नया पेच, रजिया सुल्ताना के नाम दर्ज है मकान

Fri, 21 Jul 2017 12:36 PM IST
amarujala.com, written by अजीत कुमार सिंह
विज्ञापन
rs yadav - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की वाराणसी के खजुरी स्थित कोठी को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की पूछताछ में आरएस ने जिस आलीशान कोठी को अपनी सास द्वारा पत्नी को गिफ्ट में मिला बताया था, राजस्व रिकार्ड में वह किसी रजिया सुल्ताना के नाम दर्ज है।
विज्ञापन


नगर निगम के कर अधीक्षक की रिपोर्ट से हुए इस खुलासे से जांच एजेंसियां भी हैरान हैं। रजिया सुल्ताना पत्नी शेख राशिद अली कौन हैं, कहां रहती हैं, इस मकान और आरएस के बीच के संबंधों जैसे कई अहम सवाल जांच एजेंसियों के सामने हैं।

विजिलेंस और पुलिस को आशंका है कि यह मकान भी यादव की बेनामी संपत्तियों का ही एक हिस्सा हो सकता है। नगर निगम के दस्तावेजों के आधार पर पुलिस के अलावा विजिलेंस ने भी इसकी पड़ताल शुरू कर दी है।
विज्ञापन


गिरफ्तारी के बाद आरएस ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि वह खजुरी स्थित जिस मकान (एस 8/109 जी-1) में रहते हैं, वह उनकी सास ने उनकी पत्नी को उपहार में दिया था। बताया था कि उनके नाम से कोई संपत्ति नहीं है।

आरएस यादव की ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए जो प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, उसमें भी उन्होंने अपना पता एस 8/109 जी-1 दर्ज कराया है। इस मकान की पड़ताल की गई तो इसमें नए पेच सामने आए। नगर निगम के कर अधीक्षक तिलक राम द्वारा दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मकान नंबर एस 8/109 जी-1 रजिया सुल्ताना पत्नी शेख राशिद अली के नाम से दर्ज है।

1998-99 तक इसका टैक्स जमा किया गया है। इसके बाद का टैक्स जमा नहीं है। वहीं आरएस यादव के बेटे अपूर्व यादव ने अपनी तीन कंपनियों ने जो पता दर्ज कराया है, उसमें घर का पता अलग है।

क्रिस्टल अर्पाटमेंट प्राइवेट लिमिटेड के रिकार्ड के मुताबिक बेटे अपूर्व का पता एस 8/313, मकबूल आलम रोड, खजुरी दर्ज है। इसी कंपनी के रिकार्ड में आरएस की बेटी ऋचा यादव का पता एस 8/109 जी-1 दर्ज है।

कागजात की छानबीन के बाद जांच एजेंसियों का मानना है कि खजुरी में दो से तीन मकान आरएस यादव के कब्जे में हैं। राजस्व रिकार्ड में इन मकानों का मालिक कोई और है। इस पूरे मामले की जानकारी विजिलेंस के अलावा प्रवर्तन निदेशालय को भी दी गई है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें