प्रो. रंजना घोष (फाइल फाोटाो)
आईआईटी बीएचयू की प्रो. रंजना घोष (64) की मौत हो गई। सोमवार को परिसर स्थित आवास में उनका शव मिला। मां से संपर्क न हो पाने की वजह से बेटे ने उनके रिसर्च स्कालर राजेश को फोन किया। सोमवार को अपराह्न दो बजे राजेश प्रोफेसर के आवास पहुंचा। अंदर से दरवाजा न खुलने पर उसने प्राक्टोरियल बोर्ड को इसकी सूचना दी। घर का दरवाजा तोड़ा गया तो वह अंदर अचेत पड़ी मिलीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
आईआईटी बीएचयू में एप्लाइड केमिस्ट्री की प्रो. रंजना घोष बीएचयू कैंपस स्थित निवेदिता कॉलोनी में अकेली रहती थीं। उनके तीनों बच्चे यूएस में रहते हैं। रविवार की शाम को उनके बेटे ने कई बार उन्हें फोन किया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। सोमवार को भी जब फोन नहीं रिसीव हुआ तो बेटे ने उनके रिसर्च स्कॉलर सामने घाट निवासी राजेश को फोन किया। इसके बाद अपराह्न करीब डेढ़ बजे राजेश प्रोफेसर के घर पहुंचा। बहुत देर तक दरवाजा नहीं खुला तो उसने प्राक्टोरियल बोर्ड को सूचना दी।
प्राक्टोरियल बोर्ड ने लंका थाने को फोन किया। पुलिस की मौजूदगी में जब दरवाजा तोड़ा गया तो बाथरूम के बाहर प्रोफेसर जमीन पर पड़ी हुई थीं और नाक से खून बह रहा था। उन्हें तुरंत सर सुंदरलाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित किया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। बताया जा रहा है प्रोफेसर डायबिटीज की मरीज थीं। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत की वजह स्पष्ट होगी।
प्रो. रंजना घोष ने नैनो टेक्नोलाजी पर काफी शोध किया था। उन्होंने कई किताबें भी लिखी थीं, जिनमें ‘सिंथेसिस एंड कैरेक्टराइजेशन आफ नैनो क्रिस्टलाइन जिंक एल्यूमिनेट स्पाइनल पावडर बाइ सोल जेल मेथड’ प्रमुख है। उन्होंने 1972 में इलाहाबाद विवि से एमएससी और 1976 में डीफिल किया था। आईटी बीएचयू में 1993 में वे बतौर लेक्चरर नियुक्त हुई थीं। 1997 में वह सीनियर लेक्चरर और 2002 में रीडर बनीं। 2006 में एसोसिएट प्रोफेसर और 2011 में प्रोफेसर बनीं थीं।