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जुआरियों को हथकड़ी लगाकर वाराणसी पुलिस ने खिंचाईं तस्वीरें

Tue, 13 Dec 2016 04:15 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, वाराणसी
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जुआरियों को हथकड़ी लगाकर तस्वीरें खिंचवाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की चोरी गईं चांदी की पांच शहनाइयाें को नौ दिन बाद भी बरामद न कर पाने वाली जिले की पुलिस ने सोमवार को जुआ खेलने के आरोपियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाई। अपनी वाहवाही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निर्धारित प्रावधानों तक का ख्याल नहीं रखा गया।
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जुआ खेलने के आरोपियों को न्यायालय में पेश करने से पहले उन्हें हथकड़ी लगाकर बाकायदा अलग-अलग पोज में कैंट पुलिस ने फोटो खिंचाए। सोशल मीडिया पर जब ये तस्वीरें वायरल हुईं और आरोपियों को हथकड़ी लगाने पर सवाल उठने लगे तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसएसपी ने सीओ कैंट को मामले की जांच सौंपते हुए पूरी रिपोर्ट तलब की है।  


कैंट इंस्पेक्टर अबरार अहमद के अनुसार उन्हें रविवार की रात सूचना मिली थी कि कुछ लोग कैंटोनमेंट क्षेत्र स्थित एक बंगले में जुआ खेल रहे हैं। इस पर उन्होंने अपनी टीम के साथ छापेमारी की तो 11 लोग मौके पर मौजूद मिले।
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पुलिस के अनुसार ताश की पत्तियों के साथ एक लाख नब्बे हजार छह सौ अस्सी रुपये और मौजूद लोगों की तलाशी में सात हजार छह सौ अस्सी रुपये बरामद हुए। सोमवार को जब इन आरोपियोें को न्यायालय भेजने की बारी आई तो पुलिस ने उन्हें हथकड़ी पहनाकर कैंट थाना परिसर में फोटो खिंचवाया और उसे सोशल मीडिया के अलावा मीडिया को सूचना देने के लिए बनाए गए वाट्सएप ग्रुप पर भी वायरल कर दिया।
 
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हथकड़ी लगाना न्यायालय के आदेश की अवमानना

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जब हथकड़ी पर सवाल उठने लगे तो कैंट इंस्पेक्टर से लगायत उच्चाधिकारी सकते में आ गए। इस बारे में एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही कैंट क्षेत्राधिकारी को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।  अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी के मुताबिक सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन सहित कुछ अन्य मामलों में उच्चतम न्यायालय का आदेश था कि मानवाधिकारों को देखते हुए किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती।

हथकड़ी लगाने से पहले पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि आरोपी पूर्व में पुलिस अभिरक्षा से फरार हो चुका है या ऐसी कोशिश कर चुका है। इससे इतर किसी स्थिति में आरोपियों को हथकड़ी नहीं लगाई जा सकती।

बावजूद इसके यदि पुलिस ऐसा करती है तो उसके विरुद्ध उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना के आरोप में कार्रवाई की जानी चाहिए।
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