जौनपुर के कांग्रेस विधायक नदीम जावेद की प्राडो गाड़ी को लेकर संशय और गहरा गया है। अमर उजाला के पास मामले में विधायक की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी और उनके द्वारा पेश किए जा रहे कागजात उपलब्ध हैं।
विधायक के चालक द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में प्राडो का नंबर एचआर 72 0010 बताया गया है, जबकि चालक ने पुलिस को जो आरसी सौंपी है, उस पर गाड़ी का नंबर एचआर 70 सी 7425 दर्ज है।
दरअसल, गुड़गांव के राजेश कुमार ने जावेद इकबाल को केवल प्राडो गाड़ी बेची थी, नंबर नहीं। जावेद इकबाल ने चंडीगढ़ से दूसरा नंबर भी ले लिया लेकिन उसे प्राडो की नंबर प्लेट अंकित नहीं कराया। प्राडो पर पुराना नंबर एचआर 72 0010 ही लगा रहा।
विधायक नदीम जावेद भी गाड़ी पर पुराना नंबर लगा कर ही चलते रहे। मामले का खुलासा नहीं होता, अगर 30 दिसंबर को दुर्घटना के बाद गाड़ी क्षतिग्रस्त नहीं होती और दूसरे पक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज नहीं होता।
पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया पूरा मामला चोरी का नहीं बल्कि धोखाधड़ी (फोर्जरी) का लगता है।
30 दिसंबर को वाराणसी के बाबतपुर के रमईपुर में विधायक नदीम जावेद की प्राडो गाड़ी की आल्टो से टक्कर हो गई थी।
दोनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। दोनों पक्षों ने क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि प्राडो पर हरियाणा का जो नंबर मिला, वह वास्तव में फार्च्यूनर गाड़ी का है।
इस नंबर की फार्च्यूनर गुड़गांव के गुरुग्राम के सेक्टर-23 निवासी राजेश कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है। दुर्घटना के बाद सवाल खड़ा हो गया कि विधायक की गाड़ी पर यह नंबर कैसे आया? तफ्तीश में पता चला कि राजेश ने प्राडो गाड़ी 2014 में गुड़गांव के सेक्टर 14 के जावेद इकबाल को बेच दी थी।
जावेद ने चंडीगढ़ में प्राडो का नया नंबर भी अलाट करा लिया। उन्हें नया नंबर एचआर 70 सी 7425 मिला।
इसी प्राडो गाड़ी से अब नदीम जावेद चलते हैं। उन्हें गाड़ी पर नया नंबर अंकित करा लेना चाहिए था लेकिन प्राडो गाड़ी का पुराना नंबर ही इस्तेमाल करते रहे।