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कुछ तो गड़बड़ है! एक ही नंबर पर जौनपुर में नदीम जावेद की प्राडो और गुड़गांव में फार्च्यूनर

Mon, 23 Jan 2017 01:16 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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30 दिसंबर को बाबतपुर के रमईपुर में प्राडो और आल्टो में हुई थी टक्कर
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जौनपुर के कांग्रेस विधायक नदीम जावेद की प्राडो गाड़ी को लेकर संशय और गहरा गया है। अमर उजाला के पास मामले में विधायक की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी और उनके द्वारा पेश किए जा रहे कागजात उपलब्ध हैं।
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विधायक के चालक द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में प्राडो का नंबर एचआर 72 0010 बताया गया है, जबकि चालक ने पुलिस को जो आरसी सौंपी है, उस पर गाड़ी का नंबर एचआर 70 सी 7425 दर्ज है।
दरअसल, गुड़गांव के राजेश कुमार ने जावेद इकबाल को केवल प्राडो गाड़ी बेची थी, नंबर नहीं। जावेद इकबाल ने चंडीगढ़ से दूसरा नंबर भी ले लिया लेकिन उसे प्राडो की नंबर प्लेट अंकित नहीं कराया। प्राडो पर पुराना नंबर एचआर 72 0010 ही लगा रहा।
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विधायक नदीम जावेद भी गाड़ी पर पुराना नंबर लगा कर ही चलते रहे। मामले का खुलासा नहीं होता, अगर 30 दिसंबर को दुर्घटना के बाद गाड़ी क्षतिग्रस्त नहीं होती और दूसरे पक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज नहीं होता।
पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया पूरा मामला चोरी का नहीं बल्कि धोखाधड़ी (फोर्जरी) का लगता है। 
30 दिसंबर को वाराणसी के बाबतपुर के रमईपुर में विधायक नदीम जावेद की प्राडो गाड़ी की आल्टो से टक्कर हो गई थी।
दोनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। दोनों पक्षों ने क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि प्राडो पर हरियाणा का जो नंबर मिला, वह वास्तव में फार्च्यूनर गाड़ी का है।
इस नंबर की फार्च्यूनर गुड़गांव के गुरुग्राम के सेक्टर-23 निवासी राजेश कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है। दुर्घटना के बाद सवाल खड़ा हो गया कि विधायक की गाड़ी पर यह नंबर कैसे आया? तफ्तीश में पता चला कि राजेश ने प्राडो गाड़ी 2014 में गुड़गांव के सेक्टर 14 के जावेद इकबाल को बेच दी थी।
जावेद ने चंडीगढ़ में प्राडो का नया नंबर भी अलाट करा लिया। उन्हें नया नंबर  एचआर 70 सी 7425 मिला।
इसी प्राडो गाड़ी से अब नदीम जावेद चलते हैं। उन्हें गाड़ी पर नया नंबर अंकित करा लेना चाहिए था लेकिन प्राडो गाड़ी का पुराना नंबर ही इस्तेमाल करते रहे। 

विधायक के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर किया दुष्प्रचार 

सोशल मीडिया पर किया दुष्प्रचार

विधायक नदीम जावेद के चालक मुकेश पांडेय ने एफआईआर के समय प्राडो गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के पेपर फूलपुर पुलिस को दिए थे।
रजिस्ट्रेशन पेपर से स्पष्ट है कि हादसे का शिकार हुई प्राडो का असली नंबर एचआर 70 सी 7425 है।
रविवार को मामला सामने आने पर विधायक के समर्थकों ने जौनपुर में सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार शुरू कर दिया।
कहा, हादसे में घायल विधायक का दिल्ली में इलाज चल रहा है। महीनों पहले प्राडो गाड़ी के सभी कागजात ट्रांसफर कराए जा चुके हैं।
बेदाग विधायक के दामन पर विपक्ष लगातार दाग लगाने का प्रयास कर रहा है।
वहीं उनके मीडिया विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि विधायक पर झूठा इल्जाम लगा कर उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

बताया गया है कि विधायक के रिश्तेदार जावेद इकबाल ने प्राडो गाड़ी हरियाणा के राजेश कुमार से खरीदी थी। जावेद इकबाल के नाम पर गाड़ी रजिस्टर्ड कराई गई थी। 
 
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जांच में फंसेगा नदीम जावेद का चालक

सोशल मीडिया पर किया दुष्प्रचार

30 दिसंबर को हादसे के बाद नदीम जावेद के चालक जौनपुर निवासी मुकेश पांडेय ने आल्टो कार सवार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
उसके द्वारा दी गई तहरीर में स्पष्ट लिखा था उसकी प्राडो का नंबर (एचआर 72 0010)है। बाद में उसने जमानत के लिए न्यायालय में जो आवेदन किया उसमें भी प्राडो का नंबर (एचआर 72 0010) ही दर्शाया गया। प्राडो की टक्कर आल्टो से हुई थी।
आल्टो कार सवार गाजीपुर के शेरपुर निवासी शिक्षक प्रवीण कुमार राय और उनके मित्र कमलेश भी जख्मी हो गए।
दोनों जौनपुर में ही शिक्षक हैं और जौनपुर से वाराणसी आ रहे थे। उन्होंने प्राडो के चालक पर केस कराया था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ फूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

राजेश ने अपने पास रखा नंबर
राजेश ने सबसे पहले वीआईपी नंबर (एचआर 72 0010) को अपनी प्राडो कार पर अंकित कराया था, लेकिन करीब तीन साल पहले उसने प्राडो गुड़गांव में किसी व्यक्ति को बेच दी थी।
लेकिन गाड़ी का यह वीआईपी नंबर उसने अपने पास ही रखा। बाद में उन्होंने स्कार्पियो गाड़ी खरीदी। उस गाड़ी को भी इसी नंबर पर रजिस्टर्ड कराया। फिर कुछ समय बाद उसने स्कार्पियो को भी बेच दिया लेकिन यह नंबर अपने ही पास रखा।
इसके बाद उन्होंने फार्च्यूनर गाड़ी खरीदी, जिसे भी इसी नंबर पर रजिस्टर्ड कराया। एसीपी संजीब बल्हारा ने बताया कि पुलिस टीम द्वारा मौके पर जाकर की जांच में गाड़ी मौके पर मिली है। सब कागजात ठीक  पाए गए हैं।
वहीं इस मामले में एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय का कहना है कि 25 हजार रुपये जमा कर पुरानी गाड़ी का वीआईपी नंबर नई गाड़ी के लिए आरक्षित कराया जा सकता है। हालांकि पुरानी गाड़ी का नंबर बदलवाना होगा। एक नंबर एक ही गाड़ी पर रहेगा। 
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