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आखिरकार थम गई मनीष की सांस

Wed, 06 Jan 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
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 विकास प्राधिकरण पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए 28 दिसंबर को कमिश्नरी में पेट्रोल डालकर आग लगाने वाले सराफा कारोबारी मनीष अग्रवाल की मंगलवार की सुबह छह बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई।
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 परिवार वाले मनीष के  शव को सड़क मार्ग से वाराणसी ला रहे हैं। मंगलवार की देर रात उनके वाराणसी पहुंचने की उम्मीद है। मनीष की मौत की सूचना के बाद से पुलिस और प्रशासनिक अमला सकते में है।
मनीष की मां मालती देवी के नाम से कोतवाली थाना क्षेत्र के राज मंदिर मोहल्ले में मकान है।
विकास प्राधिकरण ने उनके मकान को गंगा से दौ सौ मीटर के दायरे में बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया था। इसे लेकर मनीष परेशान रहते थे।
28 दिसंबर को वह इस सिलसिले में मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण से मिलने गए थे। इसी दौरान उन्होंने कमिश्नरी बार भवन के सामने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली।
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वकीलों और पास में काम कर रहे मजदूरों ने किसी तरीके से आग बुझाई। बाद में उन्हें पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर उन्हें बीएचयू रेफर कर दिया गया।
बेहतर इलाज के लिए घरवाले उन्हें शुक्रवार को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले गए थे। सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान मंगलवार की सुबह उनकी मौत हो गई।
दिल्ली में मौजूद मनीष के जीजा रूपेश ने बताया कि वह मनीष के शव को सड़क मार्ग से वाराणसी ला रहे हैं। मनीष की पत्नी भी उनके साथ ही थीं। माता-पिता वाराणसी में हैं।
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