बारूद, गंधक सहित बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद
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यूपी के चंदौली जिले की कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को घनी आबादी के बीच अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। पुलिस की छापेमारी में फैक्ट्री से 60 किलोग्राम बारूद, 30 किलोग्राम गंधक पाउडर, 130 सुतली बम, आठ किलोग्राम लोहे व पांच किलोग्राम एल्युमिनियम का बुरादा सहित बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद हुआ।
बाद में कोतवाली में एसपी संतोष कुमार सिंह ने पत्रकारों के समक्ष कार्रवाई का खुलासा किया। बताया कि पटाखा फैक्ट्री संचालन के आरोप में जलीलपुर पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत मढ़िया गांव निवासी उस्मान अली उर्फ गुड्डू व अब्दुला उर्फ पप्पू को गिरफ्तार किया है।
एसपी ने बताया कि दोनों पहले वाराणसी के पितरकुंडा क्षेत्र में रहते थे और लगभग एक वर्ष पूर्व मढ़िया में अपना मकान लेकर रह रहे थे। बताया कि पकड़े गए आरोपियों के अन्य कनेक्शन को खंगाला जा रहा है।
साथ ही इस बात की तस्दीक भी की जा रही है कि यहां बनने वाले पटाखे कहीं किसी असामाजिक व्यक्तियों को तो नहीं जाते थे। एसपी ने बताया कि बरामद बारूद को वाराणसी से आए बम डिस्पोजल टीम को सौंप दिया गया है, जो उसे खाली स्थान पर ले जाकर नष्ट कर देगी।
एसपी ने टीम में शामिल पुलिस कर्मियों को10 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।
मुबंई में सीखा था बारूद से पटाखा बनाना
पुलिस गिरफ्त में आरोपी
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घनी आबादी के बीच अवैध पटाखा फैक्ट्री चलाने के आरोप में पकड़े गए उस्मान और अब्दुला दोनों आपस में रिश्तेदार हैं। सूत्रों के अनुसार उस्मान पांच साल मुंबई में बीता चुका है और उसने वहीं बारूद से पटाखा बनाने का हुनर सीखा था। पुलिस के अनुसार जितना सामान घर में रखा था यदि उसमें ब्लास्ट हो जाता तो काफी ज्यादा क्षति हो सकती थी।
होली या दीपावली पर्व आते ही पुलिस पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों की जांच पड़ताल को लेकर सक्रिय हो जाती है लेकिन समय बीतने के बाद इन पर विभाग की कोई नजर नहीं रहती। वहीं लोकल इंटेलिजेंस यूनिट की सुस्त चाल के चलते ऐसे कारखाने पकड़ में नहीं आ पाते है।
बता दें कि 28 फरवरी 2017 को जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र चकिया में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने के बाद पुलिस को इसकी भनक लगी थी। पुलिस के अनुसार 26 अक्टूबर 2016 को वाराणसी के पितरकुंड स्थित एक मकान में चल रही पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद उस्मान और अब्दुला वहां अपनी संपत्ति बेचकर मढ़िया में आकर रह रहे थे।