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बीएचयू में छात्रा के साथ फिर छेड़खानी, नशे में धुत बाइक सवार दो युवकों ने मारा धक्का

Mon, 16 Oct 2017 10:59 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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बीएचयू में छात्राओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं रुक नहीं रही है। 21 सितंबर को परिसर के भारत कला भवन चौराहे पर छेड़खानी की घटना की जांच अभी चल ही रही है कि अंग्रेजी विभाग के पास एक छात्रा दो युवकों की छेड़खानी का शिकार हो गई। 
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छेड़खानी की वारदात शाम चार बजे अंग्रेजी विभाग के सामने तब हुई, जब कला संकाय में पढ़ने के बाद छात्रा अपनी स्कूटी से घर जा रही थी। आरोप है कि छात्रा को दो बाइक सवार युवकों ने ठोकर मारी, इससे वह गिरते-गिरते बची।

पीछे मुड़कर इसका विरोध शुरू किया तो युवक उसे गाली देते हुए फिर उसकी ओर झपटे। हाथापाई की कोशिश की गई। घटना के समय कार्यवाहक कला संकाय अधिष्ठाता को लेने गई चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह उधर से लौट रही थीं।
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उन्होंने तत्काल क्यूआरटी को बुलाया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ में एक युवक ने अपना पता सीर गोवर्धनपुर बताया। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि गाड़ी चलाने वाला युवक शराब के नशे में था।

जब सर सुंदरलाल अस्पताल ले जाकर जांच कराने की बात कही तो पैर पकड़कर रोने लगा। इस पर उसे दुबारा कैंपस में न आने का लिखित माफीनामा लिया गया और आधार कार्ड की छायाप्रति लेकर छोड़ दिया गया। कहा, बाहरी युवकों के खिलाफ अभियान चलाकर जांच की जा रही है। 
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विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में

फाइल
छोटी-छोटी घटनाओं की सूचनाएं पुलिस को आनन-फानन में देने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन ने छेड़खानी की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया है। छात्रा के साथ छेड़खानी की घटना के दो आरोपी युवकों को पकड़ने के बाद खानापूरी कर छोड़ने से जाहिर होता है कि उसकी रुचि ऐसी घटनाओं पर पर्दा डालने की है।

ऐसा तब किया गया, जब 21 सितंबर को एक छात्रा से छेड़खानी के विरोध में आंदोलित छात्राओं पर 23 सितंबर की रात महिला महाविद्यालय में लाठीचार्ज करने को लेकर देश भर में हुए विरोध के बाद कुलपति प्रो.जीसी त्रिपाठी को छुट्टी पर जाना पड़ गया।

जानकार मानते हैं कि यदि मामले की जानकारी लंका पुलिस को दी जाती, आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाती तो शायद 21 सितंबर की घटना के आरोपी तक भी पहुंचना संभव हो सकता था।

यह इसलिए, क्योंकि 21 सितंबर को बीएफए छात्रा के साथ हुई घटना को लेकर अभी तक साफ नहीं हो सका है कि जिस व्यक्ति ने वारदात की थी, वह छात्र है या कोई बाहरी व्यक्ति।

ऐसे में इन युवकों से पुलिस की पूछताछ में कुछ सवालों के जवाब मिल सकते थे। आश्चर्यजनक बात तो यह भी है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड इस घटना को छेड़खानी मानने से बच रहा है। 
 
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