चिटफंड कंपनी द्वारा पांच करोड़ रुपये के घोटाले की जांच मंगलवार को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने शुरू कर दी है। वाराणसी से आई टीम ने कंपनी के 22 खाता धारकों का बयान दर्ज किया। निवेश से संबंधित कागजात कब्जे में ले लिया। सोनभद्र जिले के म्योरपुर और अनपरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में कोलकाता की रियल ग्रुप ऑफ कंपनीज की रियल बेनिफिट कंपनी लिमिटेड ने लुभावनी स्कीम के तहत लोगों से पांच करोड़ रुपया जमा कराया था।
इसमें म्योरपुर के 30 से 40 लोगों ने निवेश किया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद कंपनी जगह-जगह की अपनी शाखाएं बंद कर भाग गई। खाता धारकों ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने मामले को आर्थिक अपराध अनुसंधान को भेज दिया। शिकायत की जांच पूर्व में बभनी और पिपरी थानाध्यक्ष रहे इंस्पेक्टर कमलेश्वर सिंह कर रहे हैं, जो अब आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा वाराणसी में हैं।
मंगलवार को मामले की जांच के लिए वे म्योरपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने खाताधारकों शिवम केसरी, रमेश केसरी, मुमताज आलम, रमाकांत सिंह, देवंती, कौशल्या देवी, होरीलाल, दौलतराम, दुर्गावती देवी, आशमीन बेगम, सुरेंद्र कुमार, नसीम अहमद सहित 22 लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
बताया कि शासन के निर्देश पर चल रही जांच के क्रम में उन्होंने चिटफंड कंपनी के खाता धारकों का बयान दर्ज कर दस्तावेज इकट्ठा किए हैं। बताया कि करीब पांच करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
आर्थिक अपराध अनुसंधान वाराणसी की टीम मंगलवार को म्योरपुर पहुंचने से मायूस खाता धारकों में उनका धन वापस मिलने की आस जगी है। टीम के म्योरपुर में होने की जैसे-जैसे खाताधारकों को जानकारी हुई वह म्योरपुर थाने के पास पहुंचकर टीम के पास अपनी शिकायतें दर्ज कराई।