इसके बाद सभी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया गया। अजय पांडेय, उसके चाचा रवींद्रनाथ व दोस्त शाहबाज खान के अलावा वाराणसी का प्रदीप कुमार सिंह, नवलपुर बसही का सोनू कुमार गुप्ता, महागांव गरथमा का विकास मिश्रा, सरसौली कैंट की प्रिया श्रीवास्तव, हुकुलगंज कैंट का अनिल, अनेई की रंजीता सिंह और बलिया के बेलहरी का अविनाश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस संबंध में एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश की जा रही है। तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सात अन्य नामजद और इस साजिश में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
आरओ बेचने का काम करने वाले स्नातक उत्तीर्ण अजय ने प्रधानमंत्री के नाम से ट्रस्ट रजिस्टर्ड करा लिया तो लगभग 50 सांसद, डीएम आफिस और मुख्यमंत्री ऑफिस को आर्थिक अनुदान के लिए चिट्ठियां भेजनी शुरू की। उसका कहना था कि वह आदर्श नरेंद्र दामोदर दास मोदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वाराणसी खोलना चाह रहा है और वह इसका कुलपति है।
इसके लिए तत्काल पिंडरा क्षेत्र में 190 बीघा जमीन आवंटित की जाए और 1000 करोड़ रुपये का आर्थिक अनुदान दिया जाए। अन्यथा की स्थिति में वह प्रधानमंत्री/ गृह मंत्री के कार्यालय में शिकायत करने के साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेगा कि उसे जनसरोकार से जुड़े काम में सहयोग नहीं मिल रहा है। अजय के धमकी भरे पत्र को जिलाधिकारी ने गंभीरता से लेकर जांच कराई तो फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
अजय के चाचा रवींद्रनाथ ने बताया कि वह दो साल पहले तक लखनऊ में एक स्थानीय समाचार पत्र में संवाददाता था। इसके बाद वह बनारस आ गया और अजय को बीते मई महीने में प्रधानमंत्री के नाम पर ट्रस्ट बनाकर पैसा कमाने के लिए सुझाव दिया।
इसके बाद चाचा और भतीजे ने शाहबाज की मदद से रवींद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री के तत्कालीन संसदीय कार्यालय के समीप एक फ्लैट लिया। फिर, उसी फ्लैट को अपने कार्यालय का पता बताते हुए सांसदों, डीएम-सीएम कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों से पत्राचार करते थे। इसके चलते जिसे भी पत्र मिलता था, तो वह उसे गंभीरता से लेता था।
गिरफ्तार अजय और उसके चाचा ने पुलिस को बताया कि हम समाजसेवा ही करना चाहते थे। उसी क्रम में फिलहाल शुरुआत किए थे और ट्रस्ट के रजिस्टर्ड होने के बाद से अभी तक कहीं से भी एक रुपये नहीं मिले थे। उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री के नाम से स्थापित ट्रस्ट को देखकर सरकारी विभाग और निजी औद्योगिक घराने भरपूर पैसा देंगे।
उन्हीं पैसों से समाजसेवा के साथ ही अपना हित भी साधा जाएगा, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। रवींद्रनाथ का कहना था कि अजय ने जिलाधिकारी वगैरह को चिट्ठी लिखने में सही शब्दों का चयन नहीं किया, शायद इसी वजह से खेल बिगड़ किया गया। प्लान तगड़ा बनाया गया था लेकिन पुलिस और प्रशासन की तत्परता के चलते शुरुआत में ही काम खराब हो गया।
तीनों आरोपियों को कैंट थाने की पुलिस ने रिमांड मजिस्ट्रेट सर्वोत्तमा नागेश शर्मा की अदालत में पेश किया। आरोपियों की जमानत अर्जी का विरोध सहायक अभियोजन अधिकारी उत्तम त्रिपाठी ने करते हुए इसे गंभीर किस्म का अपराध बताया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्य और पत्रावली के आधार पर तीनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।