पूर्वांचल में आतंक का पर्याय बना डी-9 गैंग अब यूपी एसटीएफ के निशाने पर है। हाल के दिनों में तेजी से उभरे इस गैंग के खात्मे का टास्क डीजीपी जावीद अहमद ने एसटीएफ को दिया है। नौ शार्प शूटरों वाले इस गैंग का सरगना धर्मेंद्र पचास हजार का इनामी है। पुलिस ने उस पर इनाम दो लाख करने की तैयारी की है। साथ ही, इस गैंग से जुड़े अपराधियों और उनके शरणदाताओं का ब्योरा भी तैयार कर लिया गया है।
रंगदारी के लिए वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों में कारोबारियोें की नाक में दम कर देने वाले इस गिरोह ने पिछले कुछ महीनों में तेजी से अपना जाल फैलाया है। खासकर सनी गैंग के खात्मे के बाद पूर्वांचल की पुलिस के लिए यह गैंग नई चुनौती बनकर उभरा है। कई कारोबारी और जनप्रतिनिधि इस गैंग के निशाने पर हैं। अभी बीते 22 मार्च को ही गिरोह ने चिरैयाकोट में कारोबारी विनोद सेठ की गोली मार कर हत्या कर दी थी। विनोद को रंगदारी न देने पर गोली मारी गई थी। विनोद को मऊ के एक जनप्रतिनिधि का करीबी बताया जाता है। जनप्रतिनिधि के दो अन्य करीबियों की पूर्व में भी हत्या हो चुकी है। गैंग की धमकी से परेशान मऊ के जनप्रतिनिधि के अलावा पूर्वांचल के दो मंत्रियों ने भी डीजीपी से मुलाकात की थी।
मऊ का लालू यादव कभी इस गिरोह का सरगना हुआ करता था। उसके जेल जाने के बाद धर्मेंद्र ने कमान संभाली। धर्मेंद्र आजमगढ़ के तरवां, खुटहन का रहने वाला है। उसी ने गिरोह को डी-9 नाम दिया। उसने गिरोह में पूर्वांचल के नौ शूटरों को शामिल किया है। वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, गाजीपुर समेत पूर्वांचल के कई जिलों में भाड़े पर हत्या करने और रंगदारी वसूली के लिए यह गैंग कुख्यात है।