डॉ गयासुद्दीन खान के नेतृत्व में आई लखनऊ और रामनगर एफएसएल की तीन सदस्यीय टीम ने बेंजामिन पाउडर की मदद से डॉ रीना के घर के गेट के समीप जहां वह गिरी थी, वहां से उनके खून के सैंपल एकत्र किए। बेंजामिन पाउडर रामनगर की टीम द्वारा नहीं लाने पर लखनऊ की टीम ने नाराजगी जताई। इस दौरान डॉ. आलोक के घर के कचरे के ढेर में शराब की बोतलें भी मिलीं। एफएसएल टीम के निरीक्षण के दौरान रंगनाथ सिंह भी मौजूद थे।
उठाकर और लेटी हुई अवस्था में पुतला फेंका तो गिरा गेट के भीतर :
एफएसएल की टीम ने डॉ रीना की मौत के दृश्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भूसा भर कर पुतला तैयार किया। इसके बाद डॉ रीना के घर की छत की रेलिंग से पुतले को सीधा खड़ा कर नीचे गिराया तो वह गेट से टकराते हुए वहीं गिरा जहां डॉ. रीना दो जुलाई की सुबह गिरी पड़ी मिली थी।
टीम ने मौत के दृश्य का किया नाट्य रूपांतरण
इसके बाद पुतले को लेटी हुई अवस्था में हाथ से उठा कर छत से नीचे गिराया गया, तब भी वह गेट से टकराते हुए भीतर ही गिरा। तीसरी बार पुतले को दौड़कर तेजी से छत से फेंका गया तो वह गेट के बाहर जा गिरा। हालांकि इससे डॉ. रीना की मौत के संबंध में क्या निष्कर्ष निकला, इस बारे में टीम ने कुछ भी बताने से साफ इंकार कर दिया।
बीती दो जुलाई को डॉ. रीना सिंह की संदिग्ध हाल में मौत हो गई थी। उनके पिता रंगनाथ सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में पति डॉ. आलोक और सास-ससुर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। डॉ. आलोक के भूमिगत होने पर कैंट पुलिस ने अदालत में आवेदन देकर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराया।
इस संबंध में इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह ने बताया कि डॉ. आलोक के अदालत में समर्पण करने की सूचना मिली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जौनपुर, लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद में उनकी तलाश में छापेमारी जारी है। डॉ. आलोक के समर्पण न करने पर जल्द ही उन्हें फरार घोषित कराने के लिए अदालत में आवेदन दिया जाएगा।