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डीआईजी जेल बोले, साजिश के तहत कराया गया जेल में बवाल

Sun, 03 Apr 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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डीआईजी जेल संतोष श्रीवास्तव
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जिला जेल में की जा रही कड़ाई के चलते बंदियों ने शनिवार को यहां बवाल किया। बंदी अन्य जेलों की तरह स्वच्छंदता चाहते थे, लेकिन जिला जेल के अधीक्षक अपने कर्तव्योें के प्रति सजग रहकर ड्यूटी कर रहे थे। इससे निजात पाने के लिए बंदियों ने साजिश के तहत पथराव, तोड़फोड़ और जेल अधीक्षक को बंधक बनाने की घटना को अंजाम दिया। यह बातें शनिवार की रात जिला कारागार में पत्रकारों से डीआईजी जेल संतोष श्रीवास्तव ने कहीं। कहा कि अराजकता इतनी हद तक रही कि बैरक नंबर दो और तीन के बीच की दीवार में छेद कर दिया गया। घटना बड़ी है, जल्द ही जिला कारागार में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
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डीआईजी जेल ने कहा कि 28 मार्च को न्यायिक और प्रशासनिक टीम ने जिला कारागार का दौरा किया था, लेकिन किसी भी बंदी ने कोई शिकायत नहीं की थी। इससे यह साफ पता चलता है कि कहीं न कहीं से सुनियोजित तरीके से बंदियों और जेल प्रशासन के कुछ लोगों द्वारा साजिश रची गई। कारण कि जिला जेल में हो रही कड़ाई से बंदी और उनको सुविधाएं मुहैया कराकर रुपये पाने वाले कुछ बंदीरक्षक भी कष्ट में थे। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। प्रारंभिक रिपोर्ट 24 घंटे में तैयार हो जाएगी। जो भी इस घटना के पीछे दोषी के तौर पर चिह्नित होगा वो किसी भी सूरत में बचने नहीं पाएगा।

डीआईजी जेल ने बताया कि जिला कारागार में लगे 18 लाख रुपये के सीसीटीवी कैमरों और अन्य सामानों की जो क्षति हुई है, उसके पीछे कौन बंदी थे इसकी तफ्तीश कर उन्हें भी दंडित किया जाएगा। कहा कि आशीष तिवारी की जगह बीडी पांडेय को जेल अधीक्षक के तौर पर तैनात किया गया है। साथ ही, एक अतिरिक्त जेलर पवन त्रिवेदी को यहां बुलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घटना को अंजाम देने वालों में प्रशासनिक आधार पर अन्य जेलों से स्थानांतरित होकर आए बंदियों की भूमिका रही। कारण कि जहां से वे बंदी आएं हैं उन्होंने जेल मैनुअल का सख्ती से पालन होते नहीं देखा है।
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बवाल के दौरान मारपीट में घायल हुए डिप्टी जेलर अजय राय का मोबाइल बंदियों ने छीन लिया था। एक और दो नंबर बैरक में बंद बंदी इसी मोबाइल से पत्रकारों सहित अन्य लोगों को घटना की जानकारी दे रहे थे। जब डिप्टी जेलर का मोबाइल स्विच ऑफ हो गया तब जाकर बंदियों के फोन करने का सिलसिला थमा। दो नंबर बैरक के ठीक बगल में ही बंदीरक्षकों का आवास है। इन्हीं आवासों की छत पर ही पुलिसकर्मियों समेत कई पत्रकार भी मौजूद थे। बंदियों ने पत्रकारों से अपनी आपबीती सुनाई।
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