जिला कारागार में शनिवार को बंदियों के बवाल के दौरान पुलिस और प्रशासनिक महकमा साढ़े सात घंटे तक पंगु और असहाय नजर आया। जेल अधीक्षक के बंदियों के कब्जे में होने के कारण प्रशासन कोई भी सीधी कार्रवाई कर पाने की स्थिति में नहीं था। मौके की नजाकत को देखते हुए बंदियों की मांग पर डीएम को सपा नेताओं को बुलाना पड़ा। हालांकि बंदियों ने एकबारगी सपा नेताओं के आश्वासन को भी सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन, जब दूसरी बार बैरक में घुसकर सपा नेता जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को बाहर ले आए तो सभी ने राहत की सांस ली। उधर, पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारियों की बेबसी और सपा नेताओं को बुलाया जाना चर्चा का विषय बना रहा। खुद पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारियों को यह उचित नहीं लगा जबकि उच्चाधिकारियों का कहना था कि जेल अधीक्षक के जीवन पर संकट को देखते हुए ऐसा करना पड़ा।
जिला कारागार में नौ बजे से शुरू हुआ बवाल प्रशासन लगभग 12 बजे तक भी सामान्य नहीं करा सका तो बंदियों से डीएम राजमणि यादव ने कहा कि तुम सबकी मांगें मान ली गई हैं, आखिर किसके बुलाने पर विश्वास करोगे। बंदियों ने पहले मीडियाकर्मियों फिर कारागार मंत्री को बुलाने की मांग की। अधिकारियों ने बताया कि कारागार मंत्री का आ पाना संभव नहीं है तो बंदियों ने कहा कि सपा जिलाध्यक्ष सतीश फौजी और महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल को बुलाया जाए। सपा जिलाध्यक्ष सतीश फौजी अन्यत्र होने के कारण नहीं पहुंच सके लेकिन महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल अपने लोगों के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने मामला पूरी तरह राजकुमार पर छोड़ दिया, लेकिन डेढ़ घंटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद कुछ हाथ न लगा। यह जरूर हुआ कि बवाल वाली बैरक नंबर 12 और 13 के आसपास से फोर्स और अधिकारी दूर हट गए।
इस बीच लखनऊ से फोन पर बवाल की पल-पल की जानकारी अधिकारियों से ली जाती रही और स्थिति सामान्य कराने का निर्देश दिया जाता रहा। अपराह्न 3:15 बजे राजकुमार जायसवाल, रीबू श्रीवास्तव, अब्दुल समद अंसारी, मुमताज अली फिर जेल पहुंचे और बंदियों से बातचीत के बाद बैरक से जेल अधीक्षक को बाहर लाए तो माहौल सामान्य हुआ। वहीं, जेल परिसर के में रहने वाले जेल कर्मियों के आवासों के दरवाजे दिन भर बंद रहे। उनके परिवार के लोग खौफ के साये में रहे।