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कारोबार में बढ़ती दखलंदाजी और दिवाली के उपहार को लेकर पार्टनर ने मारी थी बिल्डर को गली

Tue, 22 Oct 2019 02:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बिल्डर बलवंत सिंह(फाइल फोटो) । - फोटो : अमर उजाला
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बिल्डर बलवंत सिंह की हत्या में नामजद उनके पार्टनर व कांग्रेस नेता पंकज चौबे को पुलिस ने सोमवार को चौबेपुर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पंकज के पास से वारदात में प्रयुक्त .32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल और चार कारतूस बरामद किए हैं।

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पुलिस की पूछताछ में पंकज ने बताया कि रियल इस्टेट कारोबार में पांच साझीदारों के बीच बलवंत की बढ़ती दखलंदाजी, खुद की अनदेखी और दीवाली के उपहार वितरण को लेकर हुई कहासुनी के बाद पंकज ने दो राउंड फायरिंग की। पेट और सीने के बीच लगी एक गोली बलवंत की मौत की वजह बनी।

आरोपी पंकज चौबे

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शिवपुर थाना अंतर्गत गणेशपुर तरना निवासी रिटायर्ड डीआईजी सभाजीत सिंह के तीन बेटों में सबसे बड़े बलवंत श्री साईं बाबा इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के पांच साझीदारों में से एक थे। रविवार रात बलवंत के साझीदार रामगोपाल सिंह के अशोक विहार कॉलोनी फेज-2 स्थित आवास पर पार्टी थी। इसमें पांचों साझीदार बलवंत, रामगोपाल सिंह, पंकज चौबे, सतीश पाल और जितेंद्र मौजूद थे।

इस दौरान कारोबार के लेनदेन, हिसाब, बलवंत की बढ़ती दखल और दीवाली पर अफसरों व किसानों को उपहार देने के संबंध में बातचीत शुरू हुई। माहौल तल्ख होने लगा तो सभी ने पंकज को घर भेज दिया। लगभग 10 मिनट बाद रात 11 बजे रामगोपाल के घर से बलवंत बाहर निकले तो गेट के पास मौजूद पंकज उनसे कहासुनी करने लगा।

आरोप है कि इसी दौरान पंकज ने फायरिंग कर दी और अस्पताल पहुंचने से पहले ही बलवंत की मौत हो गई। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर सारनाथ विजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में तीन टीमें लगाई गई थीं। मुखबिर की सूचना के आधार पर उन्होंने गाजीपुर से चौबेपुर आए रमरेपुर निवासी पंकज को एसयूवी से गिरफ्तार कर लिया। पंकज की लाइसेंसी पिस्टल का लाइसेंस रद्द कराने के लिए जल्द ही जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी। 
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तत्परता दिखाते तो शायद बच जाती बिल्डर की जान
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि बलवंत के साथी तत्परता दिखाते तो शायद उनकी जान बच जाती। बलवंत गोली लगने के बाद भी सामान्य तरीके से बातचीत कर रहे थे तो उनके दोस्तों ने उनकी स्थिति ठीक समझी। किसी ने पुलिस को सूचित करने की भी जहमत नहीं उठाई। सभी बलवंत को लेकर मलदहिया स्थित अस्पताल पहुंचे तो वहां से पुलिस को सूचना मिली।

बलवंत को अस्पताल पहुंचाने में लगभग 45 मिनट से ज्यादा का समय लग गया और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत हो गई। यदि समय से चिकित्सकीय मदद मिलती तो शायद उनकी जान बच जाती।
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