वाराणसी में अपराध पर कितनी लगाम लगी है यह पिछले सात दिन का आंकड़ा बता सकता है। पुलिस अपराध कम करने का दावा करती है मगर आंकड़ा कुछ और ही बता रहा है। पिछले सात दिन में तीन लोगों को गोली मारी गई जिसमें से दो की मौत हो गई। दिनदहाड़े लूट की घटनाएं हुईं हैं।
बनारस में अपराधियों का आतंक छाया हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से जिले में सुरक्षा का दावा किया जाता है। सोमवार की देर रात कैंट थाना अंतर्गत फुलवरिया में सोमवार की रात दो नकाबपोश बदमाशों ने देशी शराब ठेके के मैनेजर रजनीकांत तिवारी (48) को गोली मार कर 50 हजार रुपया लूट लिया। वह बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती है जहां उसकी हालत खराब बताई जा रही है।
वहीं फुलवरिया क्षेत्र में शराब ठेके के मैनेजर रजनीकांत तिवारी को गोली मारकर लूटे जाने की तफ्तीश में पुलिस जुटी ही हुई थी कि तब तक ऐसी ही एक वारदात नदेसर के मिंट हाउस क्षेत्र में हो गई। यहां श्रवण मिश्र (25) को बदमाशों ने गोली मार दी। उसे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमलावर नशे में धुत थे। पुलिस ने उन्हें फरार होने से पहले दबोच लिया। श्रवण अपने गार्ड भाई से मिलने के लिए मिंट हाउस क्षेत्र में आया था।
देर रात घटी इस घटना की खबर जब सुबह लोगों को हुई तो सनसनी मच गई। बीते 11 अक्तूबर को फूलपुर थाना क्षेत्र में राइस मिल संचालक के बेटे को असलहे के बल पर आतंकित कर बदमाशों ने चार लाख रुपया लूट लिया। 11 अक्तूबर की रात सिगरा क्षेत्र में ठेकेदार विशाल सिंह पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी।
इसके बाद 13 अक्तूबर को बदमाशों ने दिनदहाड़े वरुणा पुल पर एक महिला से सवा लाख रुपया छीन लिया तो इसके कुछ ही देर बाद सारनाथ क्षेत्र में आरपीएफ के जवान से एक लाख 81 हजार रुपये लूट लिया। वाराणसी में एक सप्ताह में दिनदहाड़े लूट और हत्या की वारदात हो गई गई मगर क्राइम ब्रांच और थानेदार बदमाशों को गिरफ्तार करना तो दूर उन्हें चिह्नित ही नहीं कर सके हैं।
गौरतलब है कि रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम और कप्तान को वीडियो कांफ्रेसिंग में स्पष्ट निर्देश दिया था कि शांति और कानून व्यवस्था को लेकर किसी भी कीमत पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमलावर ने खोला मुंह तो हैरान रह गई पुलिस
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- फोटो : amar ujala
मिंट हाउस क्षेत्र में गार्ड के भाई श्रवण के दोनों हत्यारों को पुलिस ने जगतगंज में दबोच लिया। दोनों नशे में धुत थे। गोली मारने के बाद भागने के क्रम में उनकी टक्कर एक स्कूटी सवार से हुई तो असलहा निकाल लिया। शोर पर पहुंची पुलिस ने मौजूद पुलिस ने दोनों को दबोच लिया।
वो इस हालत में नहीं थे कि पुलिस उनसे पूछताछ करती। दोनों ईनामी बदमाश थे जिनमें से एक का नाम गुड्डू मामा था लेकिन पुलिस को भी नही पता था कि दबोचे गए बदमाश गुड्डू मामा और आबिद हैं। गश्त कर इंस्पेक्टर लौटे तो उन्होंने पुष्टि की तो रात 2:30 बजे के लगभग एएसपी और आईजी रेंज चेतगंज थाने पहुंचे।
मंगलवार सुबह गुड्डू मामा का नशा उतरा और नींद खुली तो पूछताछ में बताया कि वो गार्ड के भाई को मारने नहीं गए थे। वो तो 2003 में गुड्डू मामा के करीबी मुन्ना हड्डी की हत्या का बदला लेने के लिए सपा से जुड़े विजय जायसवाल को मारने गए थे।
विजय ने किसी तरह अपनी जान बचा ली। इतने में गार्ड ने रोका तो उसपर गोली चलाई जो उसके भाई को जा लगी। इधर, विजय जायसवाल पर हुए हमले के बाद मंगलवार सुबह से उनके घर लोगों का तांता लगा हुआ है। सपा के कई बड़े नेता उनके घर पहुंचे।
पापा को गोली मारने वाले बदमाश गिरफ्तार हों
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देशी शराब ठेके के मैनेजर रजनीकांत तिवारी को गोली लगने के बाद उनके दो बेटे आशीष व सौरभ और बेटी सपना अस्पताल पहुंच गए। तीनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बच्चों का कहना था कि उनके पिता की किसी से कोई दुश्मनी नही है।
तीनों ने पुलिस अधिकारियों से मांग की कि जो भी बदमाश हों उन्हें गिरफ्तार किया जाए। रजनीकांत को गोली मार कर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया तो कैंट और मंडुवाडीह थानाध्यक्ष मलदहिया स्थित निजी अस्पताल में पहुंचे।
दोनों थानेदार घटना स्थल को एक-दूसरे के क्षेत्र का बता रहे थे। इसे पर देर तक असमंजस रहा। एसपी सिटी ने स्पष्ट कर बताया कि घटनास्थल कैंट थाना क्षेत्र का है, तब दोनों थानाध्यक्ष शांत हुए।