मुख्यमंत्री ने कहा कि हम इस घटना की तह में जा रहे हैं। इसके लिए हमने दो कमेटियां बनाई हैं। यह ब्योरा जुटाने के लिए कि साल 1955, 1989 और 2017 प्रकरण में कहां-कहां पर जमीन की बात हुई है, इसके लिए अपर मुख्य सचिव राजस्वता की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है।
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इसके साथ ही यहां पुलिसिया स्तर पर कहां पर खामी रही, इस मामले में पुलिस को पहले से ही सूचना मिलने पर भी यहां पर इतनी बड़ी घटना घटित हुई, उसके लिए अपर महानिदेशक पुलिस वाराणसी जोन को इस बात की जानकरी दी गई है। उन्हें इसकी जांच करने का आदेश दिया गया है।
इस मामले में सिपाही, दारोगा, इंसपेक्टर, डिप्टी एसपी और तहसील के एसडीएम स्तर तक की जो कमी सामने आई थी, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। अभी इसकी तह में भी बहुत सारे नाम हैं जो राजनीतिक बैकग्राउंड से आते हैं। उन्होंने लगातार आजादी के बाद यानी कि 1954-55 से लेकर के इस प्रकार की घटनाओं की एक नींव डाली थी, उसकी तह में जाने की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि यह केवल यहीं पर नहीं बल्कि पूरे सोनभद्र जिले में ऐसे बहुत सारे प्रकरण हमारे संज्ञान में आए हैं, जिस पर हमारी सरकार काम कर रही है।
सरकार उन सभी चेहरों को बेनकाब करेगी, जिन्होंने वनवासियों की जनजातीय समुदायों की जमीन पर जबरन कब्जा करके उन्हें उनकी भूमि से वंचित करने का काम किया था। हमारी सरकार ने भारत-नेपाल के तराई बॉर्डर से जुड़े हुए 34 गांव में ऐसी समस्या का समाधान पिछले 2 सालों में किया है।
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