भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए चंदौली के निलंबित एआरटीओ आरएस यादव ने ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए बोगस कंपनियां खड़ी की थीं। ऐसी तीन कंपनियों की जानकारी अब तक सामने आई है।
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इनमें दो कंपनियां पश्चिम बंगाल और एक वाराणसी में रजिस्टर्ड है। इन कंपनियों के जरिए ही अरबों की काली कमाई सफेद की जाती थी। इनके निदेशक मंडल में आरएस के बेटे, बेटी, भाई, चालक और रिश्तेदार शामिल हैं।
कंपनियों के जरिए कारोबार भले ही वाराणसी में रहा लेकिन आयकर रिटर्न पश्चिम बंगाल में दाखिल होता था।
पुलिस और अन्य एजेंसियों की अब तक की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। जल्द ही पुलिस की टीमें कोलकाता और कानपुर में छापेमारी कर सकती हैं।
इन तीनों कंपनियों के बारे में प्रारंभिक जानकारियां सामने आने के बाद उनसे जुड़े अन्य विवरण जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आरएस यादव के परिवार के सदस्य और रिश्तेदारों समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा लोग मिलकर इन कंपनियों का संचालन करते हैं।
कंपनी-एक
सुपीरियर निर्माण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 14 दिसंबर 2009 को कोलकाता में रजिस्टर्ड की गई। आरएस यादव के भाई ब्रह्मदेव यादव और प्रेमचंद इसके निदेशक बनाए गए। आरएस यादव के बेटे अपूर्व यादव ने एक अक्तूबर 2013 को निदेशक के रूप में कंपनी ज्वाइन की। कंपनी का आधिकारिक पता 498/एच/1, रबिंद्र सरानी 8, श्यामपुकुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल है। तीन करोड़ रुपये से यह कंपनी शुरू की गई थी।
कंपनी-दो
आरबिट विनमय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 25 जनवरी 2006 को शुरू की गई थी। तीन करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से खड़ी की गई इस कंपनी के निदेशक आरएस यादव के बेटे अपूर्व यादव और चालक महेंद्र मौर्या हैं। यह कंपनी भी पश्चिम बंगाल के पते पर रजिस्टर्ड है। कंपनी का आधिकारिक पता 13, खुदीराम बोस सरानी, द्वितीय तल, कमरा नंबर 204 ए, कोलकाता, पश्चिम बंगाल है। इस कंपनी का पिछला रिटर्न 30 सितंबर 2016 को दाखिल किया गया था।
कंपनी-तीन
क्रिस्टल अपार्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 19 दिसंबर 2011 को शुरू की गई थी। करीब एक करोड़ से शुरू की गई कंपनी का आधिकारिक दफ्तर रामापुरा लक्सा, वाराणसी में दिखाया गया है। आरएस यादव के बेटे अपूर्व यादव, बेटी रिचा यादव, सुनील धानुका, दिलीप कुमार, बिनोद कुमार कंपनी के निदेशक हैं। रिचा यादव और अपूर्व ने एक फरवरी 2017 को कंपनी ज्चाइन की थी। बाकी तीन लोगों ने वर्ष 2011 में कंपनी ज्चाइन की। इस कंपनी का पिछला रिटर्न एक फरवरी 2017 को दाखिल किया गया था।