वाराणसी। चंदौली के चर्चित सिकरौरा नरसंहार कांड के मामले में गुरुवार को नया मोड़ आ गया। जिला जज प्रेम प्रकाश तिवारी की अदालत में मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह की ओर से आवेदन देकर कहा गया कि घटना के वक्त मैं नाबालिग था। उनकी पेशी को लेकर जहां सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त कि ए गए थे, वहीं खुफिया विभाग के अफसर भी चौकन्ने थे।
प्रकरण के मुताबिक चंदौली के सिकरौरा गांव में एक ही परिवार के सात लोगों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। इस मामले में ब्रजेश सिंह मुख्य आरोपी हैं। 29 वर्ष बाद पिछले दिनों इस मामले में रिमांड बनने के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए गुरुवार को ब्रजेश सिंह को अदालत में तलब किया था।
अदालत में पेश होने के बाद ब्रजेश ने आवेदन देकर कहा कि मेरी जन्मतिथि एक जुलाई 1968 है जबकि यह घटना नौ अप्रैल 1986 की रात साढ़े 11 बजे बताई गई है। इस प्रकार घटना के वक्त मेरी वास्तविक उम्र 17 वर्ष नौ माह आठ दिन थी।
आवेदन के साथ आरोपी की ओर से हाईस्कूल की मार्कशीट और सर्टिफिकेट भी दिए गए हैं। इन दोनों प्रमाण पत्रों में ब्रजेश सिंह को एचआर सेकेंडरी स्कूल रजवाड़ी वाराणसी में 1982 में हाईस्कूल का छात्र बताया गया है।
आवेदन में ब्रजेश सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए यह भी कहा है कि मुझे साजिशन और गलत तथ्यों के आधार पर फंसाया गया है। ऐसे में किशोर न्याय अधिनियम 2000 में निहित प्रावधानों के तहत मुझेे नाबालिग घोषित किया जाना चाहिए।
कोर्ट में मौजूद डीजीसी फौजदारी अनिल सिंह ने आपत्ति दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तिथि 14 अगस्त तय कर दी। एक अन्य मामले में ब्रजेश द्वारा मांगी गई जेड श्रेणी की सुरक्षा के मुद्दे पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया।