अध्यक्ष ने बताया कि जाति छिपाना एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 का दुरुपयोग है। इस मामले में एडीजी को कन्हैया प्रसाद के पूर्व व मौजूदा गांव के दस्तावेजों की जांच कर मनोज वर्मा को अनुसूचित जाति के आधार पर विश्वविद्यालय में नौकरी मिलने के दस्तावेज की जांच कर साक्ष्य एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोप सही मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।