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वर्चस्व की लड़ाई में हुई सपा नेता की हत्या, साथियों से दुश्मनी महंगी पड़ी

Tue, 23 May 2017 11:35 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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अंतिम संस्कार स्‍थल पर पहुंचे सांसद भरत सिंह - फोटो : अमर उजाला
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सपा नेता व बहुआरा के प्रधान प्रतिनिधि सुमेर सिंह की निर्मम हत्या के बाद जनाक्रोश को देखते हुए जिला प्रशासन ने रात में ही पोस्टमार्टम करा दिया। मृतक सुमेर सिंह के बड़े पुत्र अमित सिंह के तहरीर पर पुलिस बहुआरा निवासी पूर्व प्रधान राजनारायन सिंह, जितेंद्र सिंह, धमेंद्र सिंह व सागर सिंह उर्फ रामलखन के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना कर रही है।
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दोकटी थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव में करीब दो दशक से वर्चस्व की लड़ाई को लेकर दो गुट क्रमश: प्रधान प्रतिनिधि सुमेर सिंह व पूर्व प्रधान राजनारायण सिंह सक्रिय था। ग्रामीणों की माने तो दोनों गुटों में अक्सर वर्चस्व की लड़ाई को लेकर तू-तू मैं-मैं हुआ करता था।

लेकिन रविवार की देर शाम इस लड़ाई ने खूनी संघर्ष का रूप धारण कर लिया। इसका नतीजा रहा कि गोपालपुर निवासी धर्मवीर उपाध्याय के घर आयोजित निमंत्रण में जा रहे प्रधानप्रतिनिधि सुमेर सिंह की बाइक सवार तीन बदमाशों ने बालक बाबा ब्रहमस्थान के पास गोली मारकर हत्या कर दी।
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परिजनों की माने तो मृतक सुमेर सिंह ने तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह से सुरक्षा की मांग की थी। लेकिन थानाध्यक्ष ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके कारण उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से क्षेत्र में पुलिस के प्रति लोगों का आक्रोश व्याप्त है।

इस बाबत एसपी सुजाता सिंह ने बताया कि हत्या के पीछे वर्चस्व की लड़ाई व जमीनी विवाद सामने आ रहा है। मामले का जल्द ही पर्दाफाश कर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उधर, सपा नेता प्रधान प्रतिनिधि सुमेर सिंह का सोमवार को सतीघाट भुसौला में अंतिम संस्कार किया गया।
मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र अमित सिंह ने दिया।

 
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साथियों से दुश्मनी करना पड़ा महंगा

सांसद भरत सिंह - फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार में गांव सहित क्षेत्र के हजारों लोग और भारी संख्या में पुलिस मौजूद रही। मृतक सुमेर सिंह के अंतिम संस्कार में सांसद भरत सिंह, राज्य सभा सांसद नीरज शेखर, पूर्व विधायक जयप्रकाश अंचल, सपा के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह घाट पर पहुंच पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाते हुए दु:ख की घड़ी में साथ रहने की बात कही।

इस दौरान सभी नेताओं ने हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए घटना की शीघ्र पर्दाफाश करने की मांग की। सूत्रों की माने तो दो साथियों से दुश्मनी करना प्रधान प्रतिनिधि सुमेर सिंह को महंगा पड़ा। बहुआरा गांव में मृतक सुमेर सिंह व पूर्व प्रधान राजनारायण सिंह के बीच बर्चस्व की लड़ाई चलती रही है।

राजनारायण सिंह के गुट में रहने वाले जितेंद्र सिंह व रामलखन सिंह कभी मृतक सुमेर सिंह के गुट में रहा करते थे। लेकिन किसी बात को लेकर कुछ माह पहले दोनों लोग मृतक सुमेर सिंह के गुट से अलग हो गए और पूर्व प्रधान राज नारायण सिंह के गुट में शामिल हो गए। इसके बाद से मृतक सुमेर सिंह और जितेंद्र सिंह व रामलखन सिंह के बीच टकराहट बढ़ती गयी।  
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