तीन साल की मासूम से बलात्कार के मामले में घटना के छह दिन बाद आरोपी के खिलाफ मारपीट और छेड़खानी जैसी हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आरोप में बुधवार को इंस्पेक्टर जैतपुरा जेएन तिवारी और चौकी इंचार्ज सरैया पर्व कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सीओ चेतगंज की तहरीर पर जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज होने के कुछ देर बाद ही एसएसपी ने दोनों आरोपियों को निलंबित कर दिया। शासन के निर्देश पर एसपी सिटी इस मामले की जांच कर रहे थे। उनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई है।
जैतपुरा क्षेत्र निवासी रिक्शा चालक की तीन साल की बेटी को पड़ोस का ही एक युवक पांच जून की रात उठा ले गया था। वरुणा किनारे ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया। अगले दिन मासूम को अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही उसके पिता जैतपुरा थाने गए लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। 11 जून को इस मामले में मारपीट और छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने बलात्कार और पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया। करीब महीने भर तक मासूम का इलाज चलता रहा, लेकिन पुलिस ने उसकी सुधि नहीं ली।
इस बीच सामाजिक संस्था ‘गुड़िया’ ने शासन में इसकी शिकायत की। साथ ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर दी। शासन के निर्देश पर एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने एसपी सिटी सुधाकर यादव को जांच सौंपी। एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट के बाद बुधवार को सीओ चेतगंज कृपाशंकर सरोज की तहरीर पर जैतपुरा थाने में इंस्पेक्टर जैतपुरा जेएन तिवारी और चौकी इंचार्ज पर्व कुमार सिंह के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज न करने और जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। एसएसपी जोगेंद्र कुमार का कहना है कि इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ दोनों को निलंबित कर दिया गया है। संजीव कुमार मिश्रा को जैतपुरा का नया थाना प्रभारी बताया गया है।
सभी थानेदारों को निर्देशित किया गया है कि महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले में उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर प्रभावी कार्रवाई की जाए। ऐसा न करने पर संबंधित थानेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -जोगेंद्र कुमार, एसएसपी
डॉक्टरों पर गिर सकती है गाज
मासूम के साथ बलात्कार मामले में डाक्टरों ने भी हद दर्जे की लापरवाही बरती। मासूम को छह जून को पहले मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नौ जून को बिना उचित उपचार के उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। तीन दिन बाद उसे फिर मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 17 जून को उसे फिर डिस्चार्ज कर दिया गया। बाद में गुड़िया संस्था ने 22 जून को मासूम को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया। यहां नौ जुलाई तक उसका इलाज चला। इसी बीच गुड़िया संस्था की ओर से जनहित याचिका दायर की गई। इस मामले की जांच में कुछ डॉक्टर भी फंस सकते हैं।