ढाई साल पूर्व चिंता देवी के फांसी लगाकर खुदकुशी करने का मामला
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ढाई साल पूर्व प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर फांसी लगा लेने के मामले में शुक्रवार को सत्र न्यायाधीश राम अधार राम की अदालत ने महिला के पति दयाशंकर गोड़ को दोषी पाया। सुनवाई के बाद दस साल का सश्रम कारावास और 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अभियोजन के मुताबिक चोपन थाने में आठ सितंबर 2015 को मिर्जापुर जिला अंतर्गत चुनार थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी रामकुमार गोड़ ने अपने दामाद चोपन थाना क्षेत्र के कनछ टोला कोड़हवा निवासी दयाशंकर गोंड़ के विरुद्ध केस दर्ज कराया था।
बताया कि उसने बेटी चिंता देवी(25) की शादी मई 2007 में दयाशंकर गोड़ के साथ की थी। लेकिन नशे की लत के कारण वह चिंता से मारपीट करता था। सात सितंबर 2015 को शाम सात बजे सूचना मिली कि उसकी बेटी घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है।
पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी और दौरान विवेचना प्रताड़ना की धारा की बढ़ोत्तरी करते हुए विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आईपीसी की धारा 306 में दस साल का सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।
वहीं धारा 498 में दो वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड न देने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से पैरवी डीजीसी क्रिमिनल रामजियावन सिंह यादव ने की।