फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कौन कहेगा बाबू जी ख्याल रखिएगा

विज्ञापन
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर (चंदौली)। रांची स्थित सीआरपीएफ कैंप से एक महीने की ट्रेनिंग लेकर 11 फरवरी की सुबह बहादुरपुर स्थित घर पहुंचे अवधेश को क्या मालूम था कि घर-परिवार और गांव की उसकी आखिरी यात्रा है। आतंकी हमले में शहीद अवधेश का परिवार बेसुध हो गया है। पिता हरिकेश यादव ने बताया कि बेटे को छोड़ने के लिए खुद कैंट स्टेशन गए। वहां बेगमपुर एक्सप्रेस ट्रेन में बैठाने के बाद वह घर लौट आए। लेकिन क्या पता था कि बेटा अब दोबारा नहीं आ सकेेगा। यह कहते हुए वह फफक पड़े। उन्होंने कहा अब कौन कहेगा बाबूजी अपना ख्याल रखिएगा।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि गुरुवार की शाम कुछ लोग आए और बताया कि अवधेश का फोन बंद मिल रहा है। शुक्रवार की सुुबह शहीद होने की सूचना मिली। कहा कि मेरा लाल तो देश के लिए शहीद हो गया, अब कुछ भी घोषणा हो जाए मेरा लाल तो नहीं आ सकता। वहीं कैंसर पीड़ित मां मालती देवी की तो जैसे आंखें ही पथरा गई हैं। अब उनका इलाज कौन कराएगा, यही कहकर रो रही हैं। रोते-रोते वह बेसुध हो जा रही हैं। छोटे भाई बृजेश का भी रोकर बुरा हाल है। पत्नी शिल्पी यादव जानकारी होने के बाद होश खो बैठी हैं। मायके से पहुंचे पिता जनार्दन यादव के पैरों पर शिल्पी गिर पड़ी और बेहोश हो गई। दो बहनें पूनम और नीलम का रोकर बुरा हाल है। बहनें रो रही हैं कि अब राखी बंधवाने कौन आएगा। भैया क्यों छोड़ कर चले गए। दो साल का मासूम निखिल सबका चेहरा देख रहा है। उसे क्या पता कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं हैं।

बस! अब बहुत हो चुका
पड़ाव (चंदौली)। गांव के लाल के शहीद होने पर पूरा गांव गम में डूबा है। बूढ़े, बच्चे, महिलाएं और पुरुष और नौजवान सभी को अवधेश के इस दुनिया से जाने का गम है तो देश के लिए शहीद होने पर गर्व भी है। ग्रामीणों ने कहा कि अब बहुत हो चुका है, सरकार को आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने का वक्त आ गया है। गांव वालों के अनुसार अवधेश मिलनसार थे। अवधेश की यादें ताजा कर सभी के आंखों में आंसू भर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें