वाराणसी। सुगम यातायात के लिए शहर में चलाई जाने वाली लाइट मेट्रो का रूट करीब चार किलोमीटर कम कर दिया गया है। नए सर्वे के अनुसार, अब मेट्रो सारनाथ तक नहीं जाएगी। बजट भी सोलह हजार करोड़ से घटाकर सात करोड़ कर दिया गया है। रिपोर्ट में कुछ कमियां थीं, इसलिए सर्वे करने वाली संस्था राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस) अगले माह फिर से रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट में छोटे रूटों को रोप-वे के माध्यम से मेट्रो से जोड़ने का भी प्रस्ताव तैयार करेगी।
जाम से जूझते शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लाइट मेट्रो और रोप-वे का प्रजेंटेशन गुरुवार को कमिश्नरी में हुआ। कमिश्नर और वीडीए के अधिकारियों के समक्ष हुए इस प्रजेंटेशन में मेट्रो के लिए पहले तय रूट को कम कर दिया गया। नई रिपोर्ट के अनुसार, लाइट मेट्रो का पहला रूट बीएचयू से भेल तक होगा, जबकि बीएचयू से बेनियाबाग होते हुए काशी तक का दूसरा रूट दिखाया गया है। मेट्रो के लिए पहले दी गई रिपोर्ट में दूसरा रूट सारनाथ तक था, जिसे अब अलग कर दिया गया है। पहले की रिपोर्ट में मेट्रो का रूट 29 किमी था जो चार किमी घटाकर 25 किमी कर दिया गया है। इससे खर्च आधे से कम हो गया है। प्रजेंटेशन के अनुसार, बीएचयू से भेल तक रूट एलिवेटेड होगा, जबकि काशी वाले रूट में कहीं ऊपर तो कहीं अंडरग्राउंड रूट तैयार किया जाएगा।
लाइट मेट्रो और रोप-वे के लिए जब राइटस के अधिकारियों ने रिपोर्ट प्रस्तुति की तो इसमें निर्माण का जिक्र था, लेकिन मेंटेनेंस पर आने वाले खर्च का विवरण नहीं था। प्रजेंटेशन में बताया गया कि अब लाइट मेट्रो पर कुल 7 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि रोप-वे पर 1700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि रोप वे और लाइट मेट्रो की संयुक्त रिपोर्ट तैयार कराएं। साथ ही मरम्मत पर होने वाले खर्च को भी शामिल करें। बैठक में वीसी वीडीए राजेश कुमार, नगर नियोजक मनोज कुमार सहित कई लोग उपस्थित रहे।