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जब तक अहंकार है तब तक प्रभु दर्शन नहीं

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ोहनिया। प्राचीन शिव धाम मंदिर दरेखू में चल रहे नौ दिवसीय राम कथा में चौथे दिन पंडित चंद्रकांत चतुर्वेदी ने कहा कि जब तक अहंकार है तब तक भगवान का दर्शन नहीं हो सकता है। मन के धरातल पर भगवान श्री राम द्वारा अहंकार रूपी धनुष का खंडन के बाद ही भक्ति और भगवान का मिलन हुआ था। कहा कि अहंकार, मोह, लोभ त्याग कर प्रभु नाम का स्मरण करने से जीवन धन्य होगा।
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रायबरेली से पधारी स्वाति मिश्रा ने कहा कि संत ही जीवन में भगवंत के दर्शन करा सकता है। जब तक संत की कृपा हमारे ऊपर नहीं होगी तब तक भगवान के दर्शन नहीं होंगे। संत ही हमें प्रभु के गुणगान नामस्मरण से प्रभु के प्राप्त करने के रास्ते को प्रशस्त करते हैं। उन्हीं के बताए गए मार्गों पर चल कर हम अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे सरल साधन सत्संग ही है। उन्हीं की कृपा से हमारे जीवन में धन्यता आएगी और हमारा जीवन धन्य हो जाएगा। जीवन को अगर धन्य बनाना है तो प्रभु की चरणों की भक्ति करनी होगी। बिना प्रभु की कृपा से जीव संसार रूपी भवसागर से पार नहीं हो सकते। कथा के उपरांत समिति के प्रकाश मोदनवाल ने श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। पंडित जय प्रकाश त्रिपाठी द्वारा बाबा का रुद्राभिषेक कराया गया।
गंगापुर में स्थित सती माता मंदिर के प्रांगण में तीन दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन शुक्रवार से प्रारंभ होगा। सती माता के वार्षिक शृंगार के बाद कथा वाचन मानस पीयूष अचलानंद महाराज करेंगे। कार्यक्रम का आयोजक जन चेतना समिति की ओर से किया गया है। आयोजन समिति के मदन मौर्या ने बताया कि दिन तक संगीतमय रामकथा के पश्चात 1 अप्रैल को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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