सूबे की चुनिंदा जेलों में मोबाइल के उपयोग पर पाबंदी लगाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए जैमर किसी काम के नहीं रह गए हैं। कारण, जेलों में लगाए गए जैमर सिर्फ टू जी सिम वाले मोबाइल को ही नियंत्रित कर सकते हैं। थ्री जी और फोर जी सिम वाले मोबाइल के लिए जेलों के जैमर कारगर नहीं हैं।
जो बंदीरक्षक इसे जानते-समझते हैं, मनमानी वसूली कर वे थ्री जी और फोर जी सिम वाले मोबाइल से बंदियों की बात उनके घरवालों और परिचितों से कराते हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक जेलों के जैमर अपग्रेड नहीं किए जाते, मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी मुमकिन नहीं है।
कारागार प्रशासन के अनुसार वाराणसी के अलावा मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, लखनऊ, मिर्जापुर, कानपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर और नैनी सहित एक दर्जन जेलों में जैमर लगाया गया है। जैमर लगातार आगे बढ़ रही तकनीक के हिसाब से फिट नहीं हैं।
जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने माना कि जैमर सिर्फ टू जी सिम वाले मोबाइल पर ही यह असरदार हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
उधर, जिला कारागार में निरुद्ध कुख्यात सागर मलिक को उसकी मां से अपने मोबाइल पर बात कराने का आरोपी बंदीरक्षक शिव कुमार सोनकर गाजीपुर के देवचंदपुर स्थित अपने घर पर नहीं मिला। बता देें कि सागर मलिक को उसकी मां से मोबाइल बात कराते हुए शिव कुमार को मंगलवार को एसटीएफ की सर्विलांस टीम ने ट्रैक किया था।
शिव कुमार ने इसके बदले सागर की मां से अपने खाते में 30 हजार रुपये जमा कराए थे। शिवकुमार के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उसे निलंबित कर दिया गया है। शिव कुमार फरार हो गया।
इंस्पेक्टर कैंट ने बताया कि शिवकुमार को गिरफ्तार करने के लिए दो टीम लगाई गई है। उसके घर पर छापेमारी की गई थी। इस बीच जेल कर्मियों को सघन चेकिंग के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है। सागर मलिक की बैरक भी बदल दी गई है।