रोहनिया। प्राचीन शिवधाम मंदिर दरेखू में चल रहे नौ दिवसीय राम कथा के सातवें दिन जबलपुर से पधारीं शिरोमणि दुबे ने कहा कि बाल्मीकि के अनुसार भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में निवास किया। कर्म, ज्ञान, उपासना जहां हो, वहीं चित्रकूट है। यहां भगवान श्रीराम निवास करते हैं। ये तीनों जहां नहीं है तो त्रिकुट है। यहां पर रावण निवास करता है।
उन्होंने कहा कि अगर जीवन में भगवान को निवास कराना है तो यह अपने जीवन में तीन चीजें अपना लें। राम का निवास आपके हृदय में हो जाएगा। हमारे जीवन की तभी उपयोगिता जब हम प्रभु के नाम का गुणगान करें और दीन हीन की सेवा करें मानवता का यही धर्म है।
भभुआ बिहार से पधारे डॉ. चंद्रकांत चतुर्वेदी ने कहा कि प्रभु के नाम का स्मरण कर जीव धन्य हो जाता है। हनुमान जी ने प्रभु के नाम का स्मरण कर प्रभु के कृपा प्राप्त हो गए। हनुमान जी ने प्रभु के नाम सुमिरन से उन्हें अपने हृदय में वाश कराया। हम भी प्रभु के नाम का सुमिरन कर अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं। कथा के उपरांत समिति के नागर त्रिपाठी ने श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सुबह पं जयप्रकाश तिवारी ने बाबा का रुद्राभिषेक कराया।
अजगरा परानापट्टी संत रविदास आश्रम पर दो दिवसीय कथा के दौरान रविवार को समापन के दिन आचार्य भारत भूषण महाराज ने कहा कि सदगुरु की वाणी को मनुष्य अनुश्रवण करे तो समता और समरसता स्वत: पैदा हो जाएगी। मनुष्य के जीवन को संस्कार और शिक्षा दोनों श्रेष्ठ बना सकता है। गुरु रविदास जी ने कहा है श्रेष्ठ बनने के लिए सत्संग करना चाहिए। सत्संग से जुड़कर ऐसे रहना चाहिए जैसे मधुमक्खी और अपने छत्ते से जुड़ कर रखती है। मनुष्य के जीवन का रस सत्संग है। सहजता, नम्रता, प्यार जिसके जीवन में है वही संत है। कार्यक्रम के समापन पर हजारों लोगों ने देर शाम प्रसाद ग्रहण किया।