वाराणसी। ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव की पीडब्ल्यूडी कार्यालय में आत्महत्या के बाद भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। एडजस्टमेंट के नाम पर लोक निर्माण विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग होती है। सड़क मरम्मत से लेकर अन्य कामों के प्रस्ताव कागजों में तैयार होते हैं। काम कराए बिना ही उनकी बिलिंग होती है और ठेकेदार से लेकर अभियंता तक रुपयों बंदरबाट कर करते हैं। अब पिछले पांच सालों में एडजस्टमेंट के नाम पर हुई बिलिंग की जांच कराई जाएगी। इसके लिए शासन ने पुरानी फाइलें तलब की हैं।
दरअसल, वाराणसी लोक निर्माण विभाग में एक दशक से अभियंताओं का एक समूह सक्रिय है। कार्यालय में कई अभियंता वर्षों से जमे थे और ठेकेदारों के साथ मिलकर अपने हिसाब से काम की बिलिंग कराते थे। लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों की मानें तो समायोजन और एमबी के नाम पर फर्जी बिलिंग का खेल होता है। कई बार फर्जी प्रस्ताव बनाकर बिलिंग कराई जाती है। इसमें सबकी हिस्सेदारी तय होती है। काम के बिल की जांच के लिए माप पुस्तिका पर ब्यौरा दर्ज होता है। इसे अवर अभियंता अपडेट करता है और सहायक अभियंता उसे पास करता है। भुगतान की अनुमति के लिए बिल अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के पास भेजा जाता है। जिस ठेकेदार से अभियंताओं की सेटिंग बैठ जाती है, उसके मामले में एमबी भरे बिना ही पेमेंट करने की संस्तुति कर दी जाती है। सेटिंग बिगड़ने पर बिल वाउचर पर आपत्ति लगा दी जाती है। ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव के मामले में भी बिना एमबी के भुगतान की संस्तुति की गई थी।
अब तक सामने नहीं आया टेंडर रजिस्टर
छोटे-छोटे कामों के लिए विभाग में टेंडर रजिस्टर होता है और उस पर दर्ज कर एक लाख रुपये तक का काम ठेकेदार को दिया जाता है। अवधेश श्रीवास्तव की मौत के बाद शुरू हुई जांच में टेंडर रजिस्टर सामने नहीं आया है। टेंडर रजिस्टर न तो शासन की टीम को मिला है और न ही कार्यालय में है। ऐसे में माना जा रहा है कि टेंडर रजिस्टर के जरिए फर्जीवाड़ा किया गया होगा। टेंडर रजिस्टर के लिए भी शासन की टीम ने जवाब तलब किया है।
बिटुमिन आपूर्ति में किया जाता है खेल
लोक निर्माण विभाग सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाला तारकोल (बिटुमिन) मथुरा और बरौनी से मंगाया जाता है। ठेकेदारों को बिटुमिन विभाग की ओर से दिया जाता है और इसकी बिलिंग व आपूर्ति के नाम पर भी खेल होता है।