पुलिस मुठभेड़ में मारा गया बाबू।
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जिस पिता ने बचपन में अपने बेटे का नाम बाबू रखा, उन्हें क्या मालूूम था कि एक दिन यही बाबू अपनी उम्र से अधिक आपराधिक मुकदमों का आरोपी बनकर पुलिस मुठभेड़ में मारा जाएगा। वर्ष 2011 में करीब 20 साल की ही उम्र में दशाश्वमेध क्षेत्र के खालिसपुरा निवासी गोपाल यादव की हत्या कर जरायम की दुनिया में कदम रखने वाले इस बदमाश पर 34 मुकदमे दर्ज हुए।
काली टोपी पहन कर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए किट्टू पूर्वांचल में चर्चित था। उसका कहना था कि काला रंग महादेव का आशीर्वाद है। महादेव ही मेरी रक्षा करते हैं और वही हमें मुन्ना बजरंगी के जैसे बनाएंगे। हालांकि किट्टू का यह सपना पूरा नहीं हो सका और पुलिस की गोलियों का शिकार होने के बाद उसका अंत हुआ। किट्टू के मारे जाने के बाद सराफा कारोबारियों ने हर्ष जताया। कहा कि पुलिस और प्रदेश सरकार पर उनका भरोसा कायम है। इस घटना से अपराधी डरेंगे और आमजन सुकून से रहेंगे। कारोबारी ने एसएसपी अमित पाठक और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी ही पुलिसिंग होनी चाहिए ताकि हर कोई सुकून से रहे।
बता दें कि बड़ी पियरी निवासी रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू के पिता रामकुमार ने बचपन में उसका नाम बाबू रखा था। किट्टू के खिलाफ वाराणसी और गाजीपुर में हत्या के सात, हत्या के प्रयास में नौ और रंगदारी मांगने सहित अन्य आरोपों में 34 मुकदमे दर्ज थे। वह जरायम जगत के कुख्यात नाम रहे मुन्ना बजरंगी के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहता था। यह बातें किट्टू ने खुद मार्च 2019 में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पूछताछ में कही थी।