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वाराणसी: क्रेडिट कार्ड धारकों से तीन साल में 1.20 करोड़ की साइबर ठगी, सिबिल भी बिगड़ा; जांच में हुआ ये खुलासा

Mon, 31 Aug 2026 03:19 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

साइबर ठगों की नजर क्रेडिट कार्ड धारकों पर है। यही वजह है कि क्रेडिट कार्ड धारकों से तीन साल में 1.20 करोड़ की साइबर ठगी की गई। इस वजह से उनका सिविल स्कोर भी खराब हुआ। 
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साइबर अपराधी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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तीन साल में साइबर ठगों ने बीमा, केवाईसी अपडेट, कार्ड एक्टिवेशन और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के नाम पर केवल क्रेडिट कार्डधारकों से 1.20 करोड़ की ठगी कर ली। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश पीड़ितों को धोखाधड़ी की जानकारी तब हुई जब उनके क्रेडिट कार्ड का बिल जनरेट हुआ। इस वजह से उनका सिविल स्कोर भी खराब हुआ। 

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साइबर क्राइम सेल के आंकड़ों के अनुसार ज्यादातर शिकायतें एक से दो महीने के बाद पुलिस के पास पहुंची। क्रेडिट कार्ड से थर्ड पार्टी एप से ऑनलाइन खरीदारी देश के अलग-अलग हिस्सों में की गई। ऐसे मामले जिसमें 48 घंटे के अंदर शिकायतें दर्ज हुईं। दो साल में 11 लाख तक की रकम को होल्ड कराया गया। पीड़ितों के क्रेडिट कार्ड से हुए फ्रॉड में 85 प्रतिशत मामलों में पैसे दो साल बीत जाने के बाद भी नहीं लौटे। 

प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पीड़ितों ने इस उम्मीद में क्रेडिट बिल जमा नहीं किए कि पैसे मिल जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उनका सिबिल स्कोर भी प्रभावित हुआ। कई मामलों में बैंक द्वारा भुगतान की जिम्मेदारी ग्राहक पर ही डाल दी गई, जिससे उन्हें ठगी गई राशि का भुगतान भी करना पड़ा।
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साइबर सेल की जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश ट्रांजेक्शन म्यूल खातों में नहीं भेजे गए, बल्कि विभिन्न ऑनलाइन थर्ड पार्टी एप और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी के माध्यम से किए गए, जिससे रकम की रिकवरी और कठिन हो गई।

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साइबर फ्रॉड में दर्ज हुई शिकायतों में जांच के दौरान साइबर सेल ने बताया कि फ्राड के ज्यादातर मामले बीमा एक्टिवेशन के नाम पर हुए। नए कार्ड धारकों को बैंक बीमा का फिर देती है। ये ग्राहकों के उपर होता है कि वो बीमा ले या नहीं। यह है कि नया क्रेडिट कार्ड ग्राहक तक पहुंचते ही उसकी जानकारी अपराधियों तक भी पहुंच रही है। 

जांच में सामने आया है कि कार्ड डिलीवरी के कुछ घंटों के भीतर ही ठग बैंक अधिकारी या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं। वे कार्ड एक्टिवेशन, केवाईसी अपडेट, बीमा सत्यापन या क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं और फिर फ्रॉड कर लेते हैं।
   
क्या बोले अधिकारी
नियमों के तहत लावारिस वाहनों की पहचान और वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके निस्तारण या नीलामी का प्रावधान है। समय-समय पर नीलामी प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। जल्द ही सभी वाहनों का निस्तारण किया जाएगा। -आलोक प्रियदर्शी, एडिशनल सीपी अपराध एवं मुख्यालय
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