साइबर फ्रॉड में दर्ज हुई शिकायतों में जांच के दौरान साइबर सेल ने बताया कि फ्राड के ज्यादातर मामले बीमा एक्टिवेशन के नाम पर हुए। नए कार्ड धारकों को बैंक बीमा का फिर देती है। ये ग्राहकों के उपर होता है कि वो बीमा ले या नहीं। यह है कि नया क्रेडिट कार्ड ग्राहक तक पहुंचते ही उसकी जानकारी अपराधियों तक भी पहुंच रही है।
जांच में सामने आया है कि कार्ड डिलीवरी के कुछ घंटों के भीतर ही ठग बैंक अधिकारी या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं। वे कार्ड एक्टिवेशन, केवाईसी अपडेट, बीमा सत्यापन या क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं और फिर फ्रॉड कर लेते हैं।
क्या बोले अधिकारी
नियमों के तहत लावारिस वाहनों की पहचान और वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके निस्तारण या नीलामी का प्रावधान है। समय-समय पर नीलामी प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। जल्द ही सभी वाहनों का निस्तारण किया जाएगा। -आलोक प्रियदर्शी, एडिशनल सीपी अपराध एवं मुख्यालय