पुलिस और अदालत से मिले आंकड़ों के अनुसार, बीते दो साल में 28 मामलों में दोषियों को कारावास की सजा सुनाई गई। पांच मामलों में दोषियों को 15 दिन से 45 दिन तक की सजा हुई, जबकि 8 मामलों में अदालत ने उन्हें जेल में बिताई गई अवधि के बराबर सजा सुनाई। कुछ मामले दो से पांच साल की सजा के भी रहे। कई मामलों में आरोपियों ने अपराध के बाद वर्षों तक अदालत की कार्यवाही का सामना किया और अंत में दोष सिद्ध होने पर सजा भुगतनी पड़ी।
सजा छोटी, लेकिन कानून की पकड़ बड़ी: वरिष्ठ अधिवक्ता मंगलेश दूबे ने बताया कि अदालत से मिली कम अवधि की सजा को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। 15 दिन, 45 दिन या छह महीने की सजा होने का मतलब यह नहीं कि अपराध का कोई परिणाम नहीं हुआ। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत का फैसला आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनता है और उसे न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ता है। संदेश साफ है सजा की अवधि कम हो सकती है, लेकिन दोष सिद्ध होने के बाद अदालत का फैसला भुगतना पड़ता है।
40 दोषियों को एक से पांच साल तक की हुई सजा: एक साल में 40 अभियुक्तों को एक से पांच साल की सजा पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते बीते साल 40 अभियुक्तों को अदालत ने सजा सुनाई। जिसमें एक साल से पांच साल तक की सजा मिली। जिसमें गंभीर अपराध भी शामिल रहें।
तीन मामलों से समझिए अदालत का संदेश
- ताजा मामला कैंट थाना अंतर्गत साल 1999 में दर्ज आर्म्स एक्ट का है। जिसमें पुलिस ने धीरज कुमार उर्फ छोटू को पुलिस ने आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया। प्राथमिकी दर्ज की। केस लंबा चला। साल 2026 अगस्त में अदालत ने उसे 15 दिन साधारण कारावास की सजा सुनाई।
- 18 साल पहले मंडुवाडीह पुलिस ने आर्म्स एक्ट में भोला सिंह को चेकिंग के दौरान पकड़ा था। प्राथमिकी दर्ज हुई। कोर्ट ने उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा सुनाई। 18 साल का समय कचहरी में बीता।
- 15 साल पुराने चोलापुर के एक मामले में कोर्ट मामूली अपराध में महिला को सजा सुनाई। साथ ही जुर्माना भी लगाया।