प्रकरण का मुख्य सरगना शुभम जायसवाल पुलिस की पकड़ से बाहर है जबकि इस काले कारोबार में छह प्रमुख चेहरे समेत पूर्वांचल और पश्चिम उत्तर प्रदेश को मिलाकर 101 लोग जेल जा चुके है। 67 मामलों की जांच ईडी कर रही है। जबकि 29 के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी है।
अबतक की कार्रवाई में पूरब से लेकर पश्चिम तक 500 फर्जी फर्मों को चिह्नित कर कार्रवाई अमल में लाई गई। जांच एजेंसियों ने पाया कि गलत तरीके से कफ सिरप के कारोबार का केंद्र वाराणसी, कानपुर, शाहजहांपुर, लखनऊ, रांची, गाजियाबाद और अहमदाबाद रहा। सात शहर में मुख्य सरगना समेत 36 लोगों के पास कारोबार का हिसाब, डिलेवरी और हवाला की रकम को खपाने की जिम्मेदारी थी।
काली कमाई से मुख्य अभियुक्तों में तीन राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे और पानी की तरह पैसा बहा रहे थे। इसमें शुभम जायसवाल, अमित सिंह टाटा और बीते दिनों गिरफ्तार हुआ विकास सिंह नरवे। विकास सिंह के बारे में जो जानकारी सामने आई उसने अपने गांव और क्षेत्र को चुनावी बैनर पोस्टर से रंग दिया था।
ब्लॉक के एक बड़े नेता का संरक्षण भी उसे प्राप्त था। जैसे ही कफ सिरप प्रकरण में इसका नाम आया और प्राथमिकी दर्ज हुई गांव और क्षेत्र से बैनर पोस्टर हटवा लिया गया। जबकि अमित सिंह टाटा ब्लॉक प्रमुखी की तैयारी कर रहा था और शुभम पक्ष और विपक्ष दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं के संपर्क में था और राजनीति में कदम रखने के लिए शतरंज बिछा रहा था।
इस धंधे को शुभम लीड करता था जिसमें अमित सिंह टाटा, आलोक सिंह, विकास सिंह नरवे, आकाश पाठक, अंकित श्रीवास्तव जैसे बड़े नाम के अलावा अन्य की गिरफ्तारी हुई जबकि पश्चिम में विशाल, विभोर राणा, सौरभ त्यागी, शिवानंद समेत अन्य की गिरफ्तारियां हुई। इस मामले पूर्वांचल के कई साझेदार एसटीएफ और एसआईटी की रडार पर हैं।