तीनों ज्योर्तिलिंगों को जोड़ने वाली देश की तीसरी कारपोरेट ट्रेन महाकाल एक्सप्रेस की सवारी यात्रियों को खूब रास आ रही है। हालांकि पहले कामर्शियल रन 20 फरवरी को सबसे अधिक 722 यात्रियों ने सवारी की और इसके बाद 27 फरवरी को 717 यात्रियों ने महाकाल से सफर किया। तृतीय श्रेणी कोच वाले महाकाल एक्सप्रेस में किराये के साथ ही अन्य खानपान की सुविधाएं यात्रियों को दी जा रही हैं।
कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 7 से काशी महाकाल एक्सप्रेस मंगलवार और बृहस्पतिवार को अपराह्न 2.45 बजे इंदौर के लिए खुल रही है। वाराणसी, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर, झांसी, बीना, भोपाल और उज्जैन के रास्ते इंदौर जा रही है। वहीं प्रत्येक रविवार को अपराह्न 3.15 बजे वाराणसी से प्रयागराज के रास्ते कानपुर होते हुए इंदौर पहुंच रही है। यह ट्रेन दूसरे दिन सुबह 8.30 बजे उज्जैन और 9.40 बजे इंदौर पहुंचा रही है।
सात दिनों में यात्रियों की अच्छी संख्या महाकाल एक्सप्रेस को मिली। यात्री सुविधाओं की बढ़ोतरी को लेकर और भी प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ बिंदुओं पर चर्चा भी हुई है, मसलन प्रत्येक कोच में सफाई कर्मी और वंदे भारत की तर्ज पर यात्रियों को ट्राली के जरिये खाद्य सामाग्री आदि का वितरण किया जाएगा।
अश्विनी श्रीवास्तव, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी