कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास अन्य कोई सुविधा नहीं है। संघ ने सरकार से दो माह का बकाया मानदेय और पीपीई किट मुहैया कराने की मांग की है। अगर उनकी मांग पूरी नहीं की जाती है तो एक अप्रैल से एंबुलेंस सेवा हो सकती है। वहीं अप्रैल से अपना काम बंद कर सामूहिक रूप से त्याग पत्र सेवा प्रदाता कंपनी जीवीके को सौंप देंगे। जिसकी जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी की होगी।
एंबुलेंस यूनियन कमेटी के जिलाध्यक्ष रामपाल चौधरी ने बताया कि दो माह से एंबुलेंस चालकों व पैरामेडिकल स्टाफों को मानदेय नहीं मिला है। जिससे हम लोगों का परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा कोरोना मरीजों को लाने व ले जाने के लिए कोई सुरक्षा किट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उन्हें भी संक्रमण की आशंका हमेशा बनी रहती है। अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो एक अप्रैल से सेवा ठप कर अपना इस्तीफा सौंप देंगे।
108 व 102 एंबुलेंस के जिला समन्यवक रविशंकर शर्मा ने बताया कि देशहित में सेवा करना पहली प्राथमिकता है हड़ताल नहीं। बकाया केवल चालक, पैरामेडिकल स्टाफ का ही नहीं है, इससे जुड़े सभी लोगों का है तो क्या हम इस आई विपदा में सेवा देना बंद कर देंगे। किसी प्रकार की कोई हड़ताल नहीं होगी, पूरा स्टाफ पूर्व की भांति कार्य संपादित करेगा।