वाराणसी। ज्येष्ठ की तपती दुपहरी में मानो आसमान से अंगारे बरस रहे हो। बात जब हाईवे की आए तो बगैर एसी के कार में सफर करने वाला भी झुलस जाए। इसी झुलसती दोपहरी में आग उगलती तारकोल की सड़कों पर मजदूरों का पग थम नहीं रहा, बल्कि लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोई टूटे चप्पल तो कोई पैर की तालू में कपड़े बांधकर अपने घरों की मंजिल तय कर रहा।
हरियाणा, गुजरात, नई दिल्ली, मुंबई आदि राज्यों से 1500-2000 किमी का सफर पैदल तय करने वाले मजदूरों के जूता और चप्पल रास्ते में टूट जा रहे हैं। पैरों में छाले और जख्म इतने गहरे हैं कि एहसास करते हुए रूह कांप उठता है। मजदूरों के इस असहनीय पीड़ा को महसूस किया है काशी के कुछ युवाओं ने। बतौर मददगार यह युवा इन दिनों हाईवे पर बड़ी ही खामोशी से मजदूरों को राहत सामग्री और मेडिकल किट उपलब्ध करा रहे हैं। मजदूरों के लिए चप्पल, स्प्रे, ग्लूकोज, केला, बोतलबंद पानी, बिस्किट, बच्चों के लिए दूध, छाले का मलहम, रूई, पटटी, मास्क, सैनिटाइजर और भोजन पैकेट भी उपलब्ध करा रहे हैं।
दारानगर निवासी अमन यादव, पांडेयपुर के राजू वर्मा, आशीष यादव, धीरज सोनकर, सुनील यादव, राजीव रंजन मिश्रा इन युवाओं की टोली शाम के समय हाईवे पर अपने चार पहिया वाहन से राहत सामग्री लेकर निकलती हैं। रास्ते में आराम को ठहरे श्रमिकों या फिर चलते हुए मजदूरों को राहत सामग्री दे रहे हैं।