कोरोना काल ने मानव जीवन को ऐसा दंश दिया है जो लंबे समय तक हर किसी को सालता रहेगा। कहीं परिवार के परिवार संक्रमित हो गए तो कहीं संक्रमण के कारण मां-बाप का साया बच्चों के सिर से उठ गया। कई परिवार तो ऐसे हैं जहां बच्चों के अलावा कोई बड़ा बचा ही नहीं है। बच्चों को संभालने वाले ही संक्रमण के कारण चले गए तो रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने किसी तरह ढांढस बंधाया। हर किसी को बस यही चिंता सता रही है कि अब इन बच्चों का भविष्य क्या होगा?
आशापुर लोहिया नगर के रहने वाले एक परिवार में पहले पत्नी कोरोना संक्रमित हुई और उसके बाद पति। पत्नी का निधन 13 अप्रैल को हो गया और 14 अप्रैल को पति ने दम तोड़ दिया। पति-पत्नी की मौत के बाद चार बच्चे अनाथ हो गए। सबसे बड़ी पुत्री का विवाह हो चुका है। दो बेटियां बालिग हैं और एक बेटा नाबालिग है।
भक्तिनगर में रहने वाले एक परिवार पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद मां का भी निधन हो गया। तीनों बेटियां अनाथ हो गईं। एक की उम्र 21 साल है तो बाकी नाबालिग हैं। परिवार में किसी और सदस्य के नहीं होने के कारण बड़ी बेटी पर ही बहनों की जिम्मेदारी आ गई है।
71 अनाथ बच्चे चिन्हित, चार हजार रुपये मासिक मिलेंगे
सरकार ने कोरोना के कारण निराश्रित बच्चों के भविष्य को संवारने का जिम्मा उठाया है। उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना लांच की गई है। इसमें बच्चों के बालिग होने तक उनके लालन-पालन व शिक्षा का खर्च सरकार उठाएगी। इसी के तहत जिले में निराश्रित बच्चों को चिन्हित करने का काम चल रहा है। कोरोना से मरने वाले अभिभावकों के 71 बच्चों को चिन्हित किया गया है। इन्हें चार हजार रुपये मासिक भी दिए जाएंगे। इनका डाटा भी ऑनलाइन कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण व चाइल्ड लाइन ने संयुक्त प्रयास से स्वास्थ्य विभाग व कोविड कमांड सेंटर से मृतक व्यक्तियों की सूची ली और परिवार से संपर्क किया। विभाग ने 71 ऐसे बच्चों को चिन्हित किया है जिनके माता-पिता कोरोना के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। इन बच्चों में कई ऐसे भी हैं, जिनके सिर्फ पिता की मृत्यु हुई और कुछ की मां का निधन हुआ। आठ सौ परिवारों में 69 ऐसे बच्चे हैं जिनके एक अभिभावक की मृत्यु हुई है। इन बच्चों की आयु 18 साल से कम है। वहीं, दो बालिकाएं ऐसी है, जिनके पिता का देहांत 2013 व माता की मृत्यु अप्रैल 2021 में कोरोना के कारण हो गई है। ये बच्चियां अपनी दादी के पास रह रही हैं। चिन्हित बच्चों का विवरण महिला कल्याण निदेशालय व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बाल स्वराज्य पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह ने बताया कि अभी भी विभाग द्वारा बच्चों का चिन्हिकरण किया जा रहा है।