कोरोना काल में केवल कोरोना संक्रमण ही नहीं, बल्कि इसे मात देने के बाद भी लोगों को तमाम बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना की जंग जीतने के बाद अब पोस्ट कोविड में अधिकांश लोगों को कहीं कमजोरी, थकान, भूख न लगना, नींद पूरी न होने, मानसिक परेशानियां बनी हुई हैं। इसके अलावा विशेषकर पहले से बीपी, शुगर, हृदय रोग के मरीजों को भी ये समस्या ज्यादा हो रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण से दौरान जितनी सतर्कता बरतनी चाहिए उससे कहीं ज्यादा पोस्ट कोविड में भी ध्यान देने की जरूरत है। कोरोना संक्रमित मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के दौरान बहुत सी दवाइयां चलती है। इसके साथ ही दिनचर्या भी असंतुलित हो जाती है। इस वजह से तमाम बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर कोरोना संक्रमण के दौरान कमजोरी, सांस फूलने सहित अन्य बीमारियों के साथ ही संक्रमण को लेकर सोचने लगतें हैं।
छह माह तक डॉक्टर के संपर्क में रहना जरूरी
बीएचयू कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. ओमशंकर का कहना है कि जो कोरोना के गंभीर मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे उन्हें पोस्ट कोविड भी खून पतला करने की दवा डॉक्टर की सलाह पर कम से कम एक से डेढ़ महीने तक लेते रहना चाहिए। कोरोना संक्रमण को मात देने के बाद छह महीने तक डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। सेहत को लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। कोरोना संक्रमण को लेकर किसी तरह की कोई बात नहीं सोचनी चाहिए, नहीं तो उसका असर कहीं न कहीं हृदय पर पड़ता है। इसके अलावा बीपी, शुगर का मरीज है उन्हें भी ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।
मानसिक तनाव भूल, सकारात्मक सोच जरूरी
बीएचयू के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. संजय गुप्ता का कहना है कि कोरोना संक्रमण और उससे ठीक होने के बाद भी किसी तरीके का मन में कोई तनाव नहीं लेना चाहिए। सकारात्मक सोच बनाये रखने की जरूरत है। पोस्ट कोविड में भी ऐसे मरीजों को ऑनलाइन परामर्श के दौरान भी सजग और सतर्क रहने का सुझाव दिया जा रहा है।
केस 1
बीएचयू ब्लड बैंक में तैनात आशुतोष सिंह 15 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए। होम आइसोलेशन में रहने के दौरान 15 दिन बाद कोरोना को मात दे दी, लेकिन उसके बाद भी कमजोरी और घबराहट जैसी समस्या बनी है। वजन घट गया है। कोरोना को मात देने के बाद रोजाना ब्लड बैंक सेवा भी दे रहे हैं।
केस दो
छितूपुर निवासी दीपिका पांडेय 18 अप्रैल को संक्रमित हुई। परिवार में पति और दो बच्चे भी संक्रमित हुए। दीपिका ने बताया कि 3 मई को कोरोना की जंग जीत ली। अभी भी कमजोरी, वजन कम होने, कभी-कभी सांस फूलने की समस्या भी होती है। डॉक्टर की सलाह पर दवा भी ले रही हूं।