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कोरोना के नए स्ट्रेन से 100 करोड़ के ऑर्डर रद्द

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वाराणसी। अपने यहां भले ही कोरोना को लेकर लोग ढुलमुल रवैया अपना रहे हो, लेकिन यूरोपीय देशों में फैले कोरोना के नए स्ट्रेन ने वहां लोगों को काफी भयभीत कर रखा है। क्रिसमस से पहले आए नए स्ट्रेन की स्थिति यह है कि यूरोप और कनाडा बंद है। 15 नवंबर से ही बाजार बंद होने से निर्यातकों का दिसंबर और अब जनवरी का ऑर्डर भी रद्द हो रहा है। निर्यातकों के अनुसार यूके में तो कर्फ्यू जैसी स्थिति है। बाजार बंद है तो बिक्री हो नहीं रही और जब बिक्री नहीं है तो फिर निर्यात आर्डर रद्द हो रहे हैं। बनारस सहित पूर्वांचल भर के 90 से 100 करोड़ के आर्डर रद्द हो गए। इसमें भदोही का कारपेट, बनारसी वस्त्र, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, होम फर्निशिंग, कुशन, वूलेन, रंग बिरंगी फेसिंग ईंटें शामिल हैं।
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पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष जुनैद अंसारी ने बताया कि बाजार थोड़ा उबरना शुरू किया था कि नए स्ट्रेन ने फिर से सब कुछ रोक दिया। क्रिसमस से पहले ही नए स्ट्रेन ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू किया तो इस बार क्रिसमस का बाजार भी नहीं हुआ। बनारस सहित पूर्वांचल से निर्यात होने वाले सामानों में कारपेट, बनारसी वस्त्र, साड़ी, होम फर्निशिंग, कुशन, वूलेन, हैंडीकाफ्ट मिलाकर 90 से 100 करोड़ के बीच आर्डर निरस्त हुआ है। अंतिम बार अक्तूबर के पहले सप्ताह में माल निर्यात हुआ था और दिसंबर में जाने वाला था, लेकिन प्रतिबंधित कर दिया गया।
पूर्वांचल निर्यातक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि नए स्ट्रेन से यूरोप व कनाडा के बाजार 15 नवंबर से ही बंद हैं। यूरोप में तो आपातकाल जैसी स्थिति है। इंग्लैंड में तो हालात और खराब हैं। सब कुछ थम गया है। इसके चलते दिसंबर व जनवरी में बनारसी वस्त्रों का आर्डर निरस्त हो गया। बनारस से ब्रोकेट, सिल्क, कॉटन और मिक्स साड़ियों का आर्डर निरस्त कर दिया गया है। स्थिति देखकर अंदाजा यही लगाया गया है कि इधर दो से तीन माह तक निर्यात का कारोबार प्रभावित रहेगा।
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हर माह एक करोड़ की ईंट का आर्डर रद्द
ईंट निर्माता परिषद के उपाध्यक्ष ओपी बदलानी ने बताया कि इंग्लैंड सहित यूरोपीय देशों को होने वाले रंग बिरंगी फेसिंग ईंट का निर्यात थम गया है। हर माह लगभग एक करोड़ रुपये की ईंट का निर्यात होता है। इधर नए स्ट्रेन के आने के बाद आर्डर रद्द हो रहे हैं, मांग नहीं है। यह ईंटे लंदन, पुर्तगाल, फ्रांस, बेल्जियम आदि देशों को समुद्री मार्ग के जरिए भेजी जाती हैं। वहीं कंटेनर आदि के खर्चें भी पहले की तुलना में दोगुने हो चुके हैं।
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