वाराणसी। कोरोना के ऐसे मरीज जो अपना खर्च खुद वहन करने में सक्षम है उनको होटल में रखकर इलाज करने के जिलाधिकारी के आदेश का असर होता नहीं दिख रहा है। तीन जुलाई को डीएम ने इस आशय का आदेश दिया था। इसके बाद होटलों को चिन्हित करने को कहा गया लेकिन अब तक महज दो ही होटल मिले और इसमें से एक में ही मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसके लिए भी मरीजों को प्रतिदिन दस हजार रुपये भुगतान करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि संबंधित होटल एक निजी अस्पताल से अटैच होकर चल रहा है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अपना खर्च खुद वहन करने में सक्षम मरीजों को होटल और निजी अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जिलाधिकारी ने होटल एसोसिएशन और नर्सिंग होम एसोसिएशन के पदाधिकारियों को पत्र लिखकर उन्हें कोविड परिसर के रूप में उपयोग करने को कहा था, उसके लिए नाम भी मांगे गए थे। हालत यह है कि अब तक बाबतपुर और नदेसर स्थित एक होटल जहा चिन्हित हुआ है वही दो निजी हास्पिटल ही इसके लिए आगे आए हैं। इसमे भी वर्तमान में एक होटल में करीब 20 मरीज भर्ती है। अब स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार मरीज को 10 हजार रुपये हर दिन देना पड़ रहा है। ऐसे में अगर एक मरीज 10 दिन भी भर्ती हुआ तो उसके इलाज में ही एक लाख का खर्च आएगा।
लखनऊ में है ढाई हजार की व्यवस्था
लखनऊ में तो ढाई हजार में ही होटल में इलाज की व्यवस्था है। यहां मरीज के भर्ती होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उनका इलाज, देखरेख भी कर रही है। जबकि अगर वाराणसी की बात करें तो यहां निजी हास्पिटल से होटल अटैच होने के बाद निजी हास्पिटल के डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ आ रहे हैं। इसी वजह से मरीजों को दस हजार देने पड़ रहे हैं।
इस संकट की घड़ी में होटल कारोबारी जिला प्रशासन के साथ हैं। स्टाफ न होने से होटल खोलने में दिक्कत आ रही है। लॉकडाउन के दौरान जो स्टाफ घर गए तो वो वापस नहीं आए। इस वजह से थोड़ी दिक्कत आ रही है। होटल कारोबारियों से लगातार बात हो रही है। जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद भी स्टाफ की कमी से बहुत से होटलों पर ताला लटका हुआ है। -गोकुल शर्मा, महामंत्री, बनारस होटल एसोसिएशन