गोडऊर गांव के पास पुल का एप्रोच मार्ग के निर्माण में लगी जेसीबी मशीन।
- फोटो : वीडियो ग्रैब
दुबिहा। मंगई व गंगा में आई बाढ़ के पानी से गोड़ऊर दलिक बस्ती के पास स्थित पुलिया निर्माण के दौरान डायर्वजन मार्ग बह गया था। सीढ़ी लगाकर लोग पुलिया पर चढ़कर आवागमन कर रहे थे। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद सक्रिय हुए लोक निर्माण विभाग की ओर से पुलिया के एप्रोच का निर्माण शुरू हो गया। 17 किलोमीटर लठ्ठूडीह- कोटवा मार्ग के गोड़ऊर दलित बस्ती के पास निर्माणाधीन पुलिया से सटकर एक डायवर्जन मार्ग बनाया गया था। बाढ़ के पानी से टूट जाने के चलते एक दर्जन से ऊपर के गांवों के लोगों का आवागमन बंद हो गया था। इस मार्ग से मड़ईला, सरदरपुर, बलीयरीयां, लालापुर, बसनियां, चरखा, जगदीशपुर, दुलारपुर, कनुवान, कोटवा और बिहार प्रांत के बक्सर जाते हैं। डायवर्जन मार्ग बह जाने से ग्रामीणों को आवागमन करने के लिए बिहार के बक्सर और कोटवा जाने के लिए करीब 45 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। लोगों ने जुगाड़ लगाया और बाजार जाने के लिए बांस की सीढ़ी से पुलिया पर चढ़कर आना-जाना शुरू कर दिया था। अमर उजाला ने 13 अगस्त को पेज नंबर तीन पर बाढ़ में बहा डायवर्जन मार्ग, सीढ़ी के सहारे आवागमन कर रहे ग्रामीण शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने पुलिया के दोनों तरफ एप्रोच मार्ग का निर्माण शुरू कर दिया। अब ग्रामीणों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी।
00000
पुलिया की दोनों तरफ जेसीबी से मिट्टी समतल कराकर बाइक और पैदल चलने लायक बना दिया गया है। बरसात बाद चार पहिया वाहनों के आवागमन संचालन के लिए भी एप्रोच भी तैयार कर लिया जाएगा।- राजेश यादव, अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग