श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की विस्तारीकरण योजना से काशी की मौलिकता पर संकट खड़ा हो गया है। काशी को संरक्षित करने के बजाय अधिकारी उसे उजाड़ने पर उतारू हैं।
काशी के मूलस्वरूप से हो रहा छेड़छाड़ जल्द न रोका गया तो इसका अस्तित्व ही दांव पर लग जाएगा। ये आरोप गुरुवार को काशी विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के पंडित राजेंद्र तिवारी ने लगाए।
उन्होंने आशंका जताई कि ये सारा षड्यंत्र काशी को अयोध्या बनाने का है ताकि चौड़ा रास्ता हो और भारी भीड़ काशी में अयोध्या की 1992 की कहानी दोहरा सके।
अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद बीजेपी के पास कोई एजेंडा नहीं होगा। लिहाजा, स्थानीय अधिकारी बीजेपी के एजेंट के रूप में उसके छिपे मकसद के लिए काम कर रहे हैं।
पराड़कर भवन में पत्रकारों से मुखातिब राजेंद्र तिवारी ने कहा कि विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना के नाम पर ज्ञानवापी परिसर स्थित प्राचीन व्यास भवन सहित कई पुरातन भवनों को ध्वस्त करा दिया गया, बिना यह सोचे कि इससे यहां के मौलिक स्वरूप पर क्या असर पड़ेगा।
अदालत में लंबित मामलों वाले भवन भी गिरवा दिए गए। विस्तारीकरण के विरोध में उन्होंने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को तीन दिन पहले ही पत्र भेजा है।
काशी का वजूद मिटने से रोकने का अनुरोध किया है। इस दौरान उन्होंने न्यास परिषद, प्रशासनिक अधिकारियों और योजना पर प्रश्नचिह्न लगाने वाले कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।