उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी मांग करती है की पीएम एक बैठक बुलाकर सभी विपक्षी नेताओं को विश्वास में लें। साथ ही बताएं कि राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार जो न्यूट्रल साइट पर बातचीत की बात कह रहे हैं, उसकी सच्चाई क्या है? अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप, उप-राष्ट्रपति और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के बयानों पर हमारा क्या रुख है। हमारे विदेश मंत्री चुप हैं, एनएसए चुप हैं और प्रधानमंत्री तो ऐसे मामलों में चुप्पी तोड़ते ही नहीं हैं। हालांकि 19 जून 2020 को उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए चीन को क्लीनचिट दे दी थी, जिसके कारण हम कमजोर पड़ गए थे।
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उन्होंने बताया कि जब हमने कारगिल युद्ध जीता था तो उसके सिर्फ 3 दिन बाद 29 जुलाई 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता रक्षा मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम ने की थी, जो विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पिता हैं। कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट को संसद में पेश भी किया गया था, लेकिन क्या सरकार अब कोई विश्लेषण करेगी? क्या प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता और विपक्ष को विश्वास में लेकर सवालों के जवाब देंगे, क्योंकि ये बेहद गंभीर मामला है।