कैंट रेलवे स्टेशन से रोजाना ढाई से पांच टन तक कूड़ा निकलता है। यह कूड़ा स्टेशन, ट्रेन और रेलवे की कॉलोनियों से निकलता है। जिसे अब रेलवे नगर निगम को न देकर खुद के उपयोग में लेगा। इन कचरों का निस्तारण करके उसे खाद बनाएगा। इसके लिए रेलवे मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी की स्थापना कर रहा है।
कैंट रेलवे स्टेशन से रोजाना 67 हजार से अधिक यात्री आते-जाते हैं। स्टेशन से सौ जोड़ी से अधिक ट्रेनें भी गुजरती हैं। जबकि स्टेशन के कर्मचारियों के लिए बगल में कॉलोनी भी बनी हैं। इन सभी स्थानों से रोजाना ढाई से पांच टन तक कूड़ा निकलता है। जिसे कूड़ा घर में एकत्र किया जाता है। इन सभी कूड़ों को निस्तारित करने के लिए नगर निगम का सहयोग लिया जाता है। जिसके लिए 40 से 50 हजार रुपये तक शुल्क भी रेलवे को देना होता है। लेकिन, अब रेलवे ने स्टेशन, ट्रेन और कॉलोनियों से निकले वाले कूड़ों को खुद निस्तारित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्लेटफार्म नंबर एक स्थित मंडुवाडीह छोर पर मटेरियल रिकवरी फेसिलिटी की व्यवस्था कर रहा है, जिसकेे लिए काम भी शुरू हो गया है। स्टेशन निदेशक गौरव दीक्षित के मुताबिक मार्च-अप्रैल तक काम पूरा हो जाएगा। सूखे कूड़ों से टुकड़े बनाया जाएगा, जबकि गीले कचरों से खाद तैयार की जाएगी, जिसे रेलवे अपने उपयोग में लेगा, फिर बचेगा तो उसकी बिक्री भी की जाएगी।