अध्ययन में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 120 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें प्राथमिक अनिद्रा की समस्या थी। सभी प्रतिभागियों को समान संख्या में तीन समूहों में विभाजित किया गया। पहले समूह को प्रतिदिन 60 मिनट योग कराया गया, दूसरे समूह को दिन में दो बार जटामांसी और तगर आधारित हर्बल दवा दी गई, जबकि तीसरे समूह को योग और हर्बल दवा दोनों का संयुक्त उपचार दिया गया।
अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता और अनिद्रा की गंभीरता का मूल्यांकन पिट्सबर्ग स्लीप क्वालिटी इंडेक्स (पीएसक्यूआई) और इंसोम्निया सीवेरिटी इंडेक्स (आईएसआई) के आधार पर किया गया। परिणामों में तीनों समूहों में सुधार देखा गया, लेकिन योग और हर्बल दवा के संयुक्त उपचार वाले समूह में सबसे अधिक सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए।
शोध के मुताबिक संयुक्त उपचार लेने वाले समूह में पीएसक्यूआई स्कोर में 41.2 प्रतिशत और आईएसआई स्कोर में 52.2 प्रतिशत तक सुधार पाया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण में यह अंतर अत्यंत महत्वपूर्ण (पी-मान 0.001 से कम) पाया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि योग और आयुर्वेदिक औषधियों का एकीकृत मॉडल अनिद्रा के इलाज में एक प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प बन सकता है।
इस टीम ने किया शोध
शोध में संज्ञाहरण विभाग, आयुर्वेद संकाय से डॉ. विजय शंकर यादव, डॉ. भोला नाथ मौर्य, काय चिकित्सा विभाग से डॉ. रोहित कुमार और शल्य तंत्र विभाग से डॉ. रुचि त्रिपाठी व न्यूरोलॉजी विभाग से डॉ. वितुर्व त्रिपाठी शामिल रहे।