आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉ. शुभ्रा घोष के बार-बार एनेस्थीसिया देने के कारण बेटी को नर्व इंजरी हो गई। इससे उसका दाहिना पैर प्रभावित हो गया और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं। मामले की शिकायत डीएम से की गई, जिनके आदेश पर सीएमओ ने एक जांच समिति गठित की। जांच में डॉ. शुभ्रा घोष को दोषी पाया गया और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी बेटी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से अत्यधिक परेशान है। नवजात बच्ची की देखभाल भी ठीक से नहीं कर पा रही है। वर्तमान में उन्हें उसे लेकर इलाज के लिए लेकर वाराणसी और लखनऊ के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
23 जून को उन्होंने इस मामले में कर्नलगंज थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। एसीपी कर्नलगंज राजीव कुमार यादव ने बताया कि तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आरोपों की जांच की जा रही है।
सीएमओ डॉ. एके तिवारी ने कहा कि डीएम के निर्देश पर जांच टीम का गठन किया गया था। इसमें मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर भी थे। जांच में डॉक्टर दोषी पाई गईं।
आरोप गलत, कोर्ट में लगाई है गुहार
इस मामले में आरोपी डॉ. शुभ्रा घोष से संपर्क नहीं हो पाया। उनकी बेटी उदिता का कहना है कि मां पर लगे आरोप गलत हैं और वह इससे बेहद परेशान हैं। दावा किया कि उन पर की गई कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में गुहार लगाई है और उन्हें राहत भी मिली है।