काशी विश्वनाथ मंदिर आचार संहिता को न्यास परिषद की मंजूरी मिल गई है। अधिग्रहण के 34 वर्ष बाद पहली बार इस तरह का प्रस्ताव न्यास परिषद ने स्वीकृत किया है, जो पुजारियों और कर्मचारियों पर सेवा नियमावली की तरह लागू होगा।
इसमें पुजारियों के लिए आदर्श आचरण के साथ ही कार्यपद्धति, पूजा पद्धति के नियम होंगे तो कर्मचारियों के लिए अनुशासन और ड्रेस कोड।
बाबा के दरबार में पूजा, कर्मकांड, धार्मिक अनुष्ठान शास्त्रों-धर्मग्रंथों और प्रथाओं के अनुसार हो सके, इसके लिए आदर्श आचार संहिता बनाई जाएगी। पुजारियों के लिए कार्यपद्धति और पूजा पद्धति के नियम बनाए जाएंगे। इसके तहत बिना त्रिकाल संध्या पूजा के कोई पुजारी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। शुद्ध मंत्रोच्चार, रुद्री पाठ का ज्ञान अनिवार्य होगा।
पुजारियों के किसी विशिष्ट श्रद्धालु के मंदिर में आने पर बयानबाजी पर भी प्रतिबंध होगा। परंपराओं, पूजा विधियों का पालन अनिवार्य किया जाएगा।
इसी तरह कर्मचारियों, सेवादारों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा ताकि श्रद्धालु कर्मचारियों को पंडा-पुजारी समझ कर भ्रमित न होने पाएं।
उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ मंदिर के अधिग्रहण के बाद से अभी तक कर्मचरियों, पुजारियों के लिए सेवा नियमावली तक नहीं लागू हो सकी है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि आचार संहिता मंजूर कर ली गई है। जल्द ही विद्वानों, आचार्यों की राय से इसे तैयार कर लागू किया जाएगा।