आईआईटी बीएचयू और एनसीएल के वैज्ञानिक सामूहिक प्रयास और केंद्र के माध्यम से कोयला उपभोक्ताओं को एक सस्ती कारगर और स्वच्छ कोयला की आपूर्ति हो सकेगी। साथ ही पेरिस समझौते के अनुसार कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। निदेशक ने बताया कि संस्थान तकनीकी ज्ञान के बारे में कोल इंडस्ट्रीज के लिए न केवल मैन पावर प्रशिक्षण और उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान किया जाएगा, बल्कि इस दिशा में स्नातकोत्तर स्तर पर शोध प्रबंध बीटेक प्रोजेक्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता पूरी की जाएगी।
कोयला ग्रेडिंग पर काम करने वालो की होगी अहम भूमिका
निदेशक ने बताया कि केंद्र की सुविधा का उपयोग बायोमास और जैव ईंधन शोधकर्ताओं के साथ कोयला उत्थान, गुणवत्ता सुधार और कोयला ग्रेडिंग के क्षेत्र में काम करने वाले छात्रों और विद्धानों द्वारा किया जाएगा। इतना ही नहीं यह केंद्र सामान्य विशेष रूप से पूर्वांचल,उत्तरी और मध्य भारत में कोयला उत्पादन, कोयला आधारित उद्योगों की आवश्यकता को भी पूरा करेगा। उपयोगकर्ता कोल इंडिया और उसके सहायक, निजी कोयला कंपनियों और कोयला आधारित उद्योग जैसे राष्ट्रीय थर्मल पावर कारपोरेशन,राज्य बिजली संयंत्र, निजी क्षेत्र के बिजली संयंत्र, कोयला उत्पादक कंपनियां होंगी।
पहले से ही चल रहा संयुक्त पीएचडी प्रोग्राम
एनसीएल से एमओयू के माध्यम से आईआईटी बीएचयू में पहले ही संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम चल रहा है। जहां प्रयोगशाला सुविधा, खदान, फील्ड डेटा का उपयोग कोयला खनन प्रौद्योगिकी और पर्यावरण के अनुकूल खनन के साथ अधिक तकनीकी और व्यावहारिक बनाने के लिए कार्य किया जाएगा।