आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी के मामले की जांच सीएमओ ने शुरू कर दी है। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद सोमवार को सीएमओ डॉ. एनपी सिंह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रभारी से महिला के जांच, इलाज, सर्जरी आदि से जुड़े जरूरी कागजात मांगे। कागजात की जांच के साथ ही सीएमओ के स्तर से गठित जांच टीम कुछ लोगों से पूछताछ भी कर सकती है।
बलिया निवासी राधिका देवी (71) को स्पाइन कॉर्ड ट्यूमर की समस्या थी। उन्हें ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था। यहां सात मार्च को उनकी सर्जरी होनी थी। ट्रॉमा सेंटर के आर्थोपेडिक्स विभाग में ही एक अन्य राधिका देवी (82) नाम की महिला भर्ती थी। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने गलती से न्यूरो सर्जरी विभाग की मरीज राधिका देवी (71) को ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर उनकी जांघ में चीरा लगा दिया। 11 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी टीम ने राधिका देवी का स्पाइन ट्यूमर का ऑपरेशन किया। 27 मार्च की सुबह उनकी मौत हो गई।
महिला के परिजनों ने आपत्ति जताई और इसकी शिकायत बीएचयू अधिकारियों के साथ ही शासन से की। इसके बाद बीएचयू के स्तर से जांच कमेटी गठित हुई। जांच समिति ने जांच कर जो रिपोर्ट दी थी, उसमें मरीज को वार्ड से ऑपरेशन थियेटर तक ले जाने वाले कर्मचारी को दोषी बताया था। जब मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की गई तो आयोग ने बीएचयू की रिपोर्ट को सही न मानते हुए जिलाधिकारी और सीएमओ से फिर से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। इस बारे में सीएमओ डॉ. एनपी सिंह का कहना है कि आयोग के निर्देश पर सोमवार को ट्रॉमा सेंटर गए। यहां प्रभारी से इस मामले में करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। घटना से जुड़े कागजात भी मांगे गए हैं। कागजात का परीक्षण कराया जाएगा।