इंदौर नगर निगम की टीम काशी में सफाई का मॉडल तो तैयार करके दे देगी लेकिन यह काम आसान नहीं है। काशी को इंदौर जैसा स्वच्छ बनाना है तो वाराणसी नगर निगम को अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करनी होगी। नगर निगम का बजट करीब छह गुना बढ़ाना होगा। इसके लिए वाराणसी को सालाना बजट 1463 करोड़ से करीब 8500 करोड़ के करीब पहुंचाना होगा।
नगर निगम काशी के पास एक रोड स्वीपर मशीन है, जबकि इंदौर नगर निगम के पास 27 मशीनें हैं। एक मशीन की कीमत करीब 70 लाख के करीब है। यानी इतनी मशीनें खरीदने के लिए नगर निगम को करीब 20 करोड़ रुपये का बजट चाहिए। काशी में सड़क की सफाई पर करीब 99 करोड़ का खर्च होता है। वहीं इंदौर इस मद में 124 करोड़ रुपये खर्च करता है।
बनारस में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या अभी करीब 6600 है जबकि इंदौर में यह संख्या 11000 हजार है। काशी को इसकी संख्या भी दोगुनी करनी होगी। इससे नगर निगम पर हर महीने करीब 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ेगा।
अभी वाराणसी हर महीने करीब 15 करोड़ रुपये का वेतन जारी करता है। काशी गलियों का शहर है। इसलिए कर्मियों की संख्या तीन गुनी तक बढ़ानी होगी। यहां 3500 सफाई मित्र हैं जबकि इंदौर में इनकी संख्या 7000 है।
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